पेट्रोल पंप पर फ्यूल डेंसिटी चेक करना क्यों है जरूरी, जानें कैसे होती है शुद्धता की पहचान
Petrol Pump Density: पेट्रोल पंप पर सिर्फ जीरो देखना ही काफी नहीं है बल्कि सही डेंसिटी की जांच करना भी बहुत जरूरी होता है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। जब भी हम पेट्रोल या डीजल भरवाने पेट्रोल पंप पर जाते हैं तो हमारी नजर सबसे पहले मीटर पर चलती जीरो की रीडिंग पर जाती है। हमें लगता है कि जीरो देख लिया तो हमारे साथ कोई धोखाधड़ी नहीं होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल जीरो देखना ही काफी नहीं है? पेट्रोल पंप पर एर और जरूरी चीज होती है जिस पर ध्यान देना बहुत जरूर है और वह है फ्यूल की डेंसिटी।
क्या है डेंसिटी नंबर?
डेंसिटी का मतलब होता है कि पेट्रोल-डीजल कितना प्योर और गाढ़ा है। तापमान बदलने के साथ फ्यूल की डेंसिटी भी बदलती है। अगर फ्यूल की डेंसिटी तय सरकारी मानकों के अनुसारों नहीं है तो इसका सीधा मतलब है कि पेट्रोल-डीजल में मिलावट की गई है या उसकी क्वालिट खराब है। पेट्रोल पंप की मशीन की स्क्री पर लीटर और कीमत के साथ-साथ स्क्रीन पर लीटर और कीमत के साथ-साथ डेंसिटी का नंबर भी लिखा होता है।
कितनी होनी चाहिए डेंसिटी?
पेट्रोल की बात करें तो यह 720 से 775 kg/m³ (kg प्रति क्यूबिक मीटर) के बीच होनी चाहिए। वहीं, डीजल की सही डेंसिटी 820 से 860 kg/m³ के बीच होनी चाहिए। अगर मीटर पर दिख रही डेंसिटी इस रेंज से कम या ज्यादा है तो समझ जाएं कि फ्यूल की क्वालिटी शंका के दायरे में हो सकती है।
खराब डेंसिटी के नुकसान
खराब या फिर गलत डेंसिटी या मिलावटी फ्यूल होने से आपकी गाड़ी का माइलेज काफी गिर जाता है। इसके अलावा, खराब गुणवत्ता का पेट्रोल-डीजल लंबे समय में गाड़ी के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर और स्पार्क प्लग को खराब कर सकता है। साथ ही, आप फ्यूल के पूरे पैसे देते हैं लेकिन आपको मिलावटी या कम एनर्जी वाला फ्यूल मिलता है
कैसे चेक करें क्वालिटी?
हर ग्राहक के पास यह अधिकार होता है कि पेट्रोल पंप पर फ्यूल की क्वालिटी जांच करें। अगर आपको डेंसिटी में कोई भी गड़बड़ी लगती है तो आप पेट्रोल पंप के कर्मचारी से फिल्टर पेपर टेस्ट करने के लिए कह सकते हैं। यह टेस्ट बिल्कुल फ्री होता है। इसके अलावा, आप 5-लीटर जार टेस्ट और हाइड्रोमीटर टेस्ट से भी डेंसिटी की जांच करवा सकते हैं।
