किसान के बेटे ने बनाई 4.5 लाख करोड़ की कंपनी, जानिए दिवालिया होने से लेकर कैसे सफलता तक पहुंची Ford
Ford Story: फोर्ड मोटर कंपनी के इतिहास में सफलता, आर्थिक संकट और शानदार वापसी की कई कहानियां शामिल हैं। आज यह दुनिया की एक प्रमुख और मजबूत ऑटोमोबाइल कंपनी है।


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। जो चीज आपको हमेशा सफलता दिलाती हो कभी-कभी वही एक दिन आपकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है। आज दुनिया की दिग्गज कार कंपनियों में शुमार Ford का इतिहास बहुत ही संघर्षों, सफलताओं और संकट से उबरने की कहानी है। एक समय ऐसा था जब Ford को खुद को बचाने के लिए अपने कारखानों, नाम और संपत्तियों को भी बैंक में गिरवी रखना पड़ा था।
किसान के बेटे ने रखी नींव
Ford की शुरुआत मिशिनग में रहने वाले एक किसान परिवार में जन्म लेने वाले Henry Ford ने की थी। 1896 में हेनरी फोर्ड ने अपने घर में पीछे चार पहियों वाली अपनी पहली गाड़ी Quadricycle बनाई थी। 16 जून 1903 को डिट्रॉइट में 12 लोगों के साथ मिलकर 28,000 डॉलर की शुरुआत पूंजी से फोर्ड मोटर कंपनी की शुरुआत हुई।
कंपनी के पहले कारखाने से Model A कार बाहर आई और कंपनी का नाम इसके संस्थापक Henry Ford के नाम पर रखा गया जिसे Ford या FoMoCo कहा जाता है।
असेंबली लाइन
1920 के दशक की शुरुआत तक दुनिया में बिकने वाली आधी से ज्यादा कारें Ford की होती थीं। 1913 में Ford ने हाइलैंड पार्क प्लांट में दुनिया की पहली मूविंग असेंबली लाइन शुरू की गई। इससे कार की चेसिस बनने का समय 12.5 घंटे से घटकर महज 93 मिनट का रह गया। इसके बाद, 1923 में Ford ने एक ही साल में रिकॉर्ड 20 लाख कारें बनाईं।
संकट में फंसी फोर्ड
2006 से 2010 के बीच Ford बड़े आर्थिक संकट में फंस गई थी और कंपनी को लगभग 50,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था। आइए इसकी वजहों के बारे में जानते हैं।
- तेल संकट: Ford की भारी ईंधन खपत वाली गैस गजलर कारों पर निर्भरता काफी ज्यादा थी जबकि लोग ज्यादा माइलेज वाली Toyota और Honda की कारों की तरफ जा रहे थे।
- क्वालिटी और सेफ्टी: 1970 दशक में Ford Pinto के फ्यूल टैंक में खराबी और 2000-2001 में Ford Explorer के फायरस्टोन टायरों से हुए हादसों ने कंपनी की साख को भारी नुकसान पहुंचाया था।
- महंगे ब्रांड्स की खरीद: 1987 से 2000 के बीच Ford ने Jaguar, Aston Martin, Land Rover और Volvo जैसी कंपनियों को खरीदने में बड़ी रकम खर्च की।
- 2008 की मंदी: मंदी आते-आते Ford का कुल घाटा 3,000 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा पहुंच गया और क्रेडिट रेटिंग गिरकर जंक स्तर पर आ गई थी।
फोर्ड ने की वापसी
2006 में कंपनी ने Alam Mulally को नया CEO बनाया जिनके नेतृत्व में फोर्ड ने कई बड़े फैसले लिए:
- फंड जुटाना: मंदी से ठीक पहले 2006 के अंत में Ford ने अपने कारखाने, फोर्ड क्रेडिट, Volvo और अपने ब्लू ओवल लोगो तक को गिरवी रखकर 2,360 करोड़ डॉलर का कैश इकट्ठा किया। इसी फैसले ने 2008 की मंदी में कंपनी को दिवालिया होने से बचा लिया।
- माइलेज पर फोकस: 1980-90 के दशक में Ford ने बेहतर माइलेज देने वाली कारों को बनाना शुरू किया। जब सेडान कारों की मांग घटने लगी तो पिकअप ट्रक्स और एक्सप्लोरर जैसी SUVs पर फोकस किया।
- One Ford प्लान: आर्थिक संकट को दूर करने के लिए Ford ने Aston Martin, Jaguar, Land Rover और Volvo जैसे ब्रांड्स को बेच दिया।
- सुरक्षा पर फोकस: टायरों की समस्या के बाद 1.3 करोड़ फायरस्टोन टायरों को वापस बदला और कारों की सुरक्षा रेटिंग पर खास ध्यान देना शुरू किया।
Ford का वर्तमान स्थिति
दुनिया की 500 सबसे बड़ी कंपनियों में Ford का 38वां स्थान है। अमेरिका की Fortune 500 सूची में यह 22वें नंबर पर आती है। इसका कुल बाजार मूल्य करीब 4.59 लाख करोड़ रुपए है। 2025 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 18 लाख करोड़ रुपए रहा। कंपनी में 1.69 लाख कर्मचारी काम करते हैं और 2025 में इसने दुनिया भर में 43.95 लाख गाड़ियों की बिक्री की।
भारत में सफर
Ford 1995 में Mahindra से साथ साझेदारी करके भारत आई थी। 25 सालों में इसका भारतीय मार्केट शेयर लगभग 4% ही रह गया जिसके चलते 2021 में कंपनी ने भारत में कारें बनाना और बेचना बंद कर दिया। हालांकि, अब Ford अपने चेन्नई प्लांट को करीब 3,250 करोड़ रुपए के निवेश से फिर से तैयार कर रही है जहां से 2029-30 से हर साल करीब 2 लाख इंजन बनाकर विदेश भेजे जाएंगे।
हाइब्रिड और EV पर दांव
कंपनी ने EV को लेकर अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। केवल पूरी तरह से इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने के बजाय अब Ford का फोकस Hybrid गाड़ीयों पर भी है। Ford का लक्ष्य है कि उसकी कुल बिक्री में 50% हिस्सेदारी हाइब्रिड, ईवी और ऐसी गाड़ियों की हो जिसमें बैटरी के साथ इंजन भी लगा हो। इसके लिए कंपनी एक यूनिवर्सल ईवी प्लैटफॉर्म भी तैयार कर रही है।
Ford की कड़ी टक्कर अमेरिका में जनरल मोटर्स और Tesla से है, जापान में Toyota और Honda से, जर्मनी में Volkswagen से, साउथ कोरिया में Hyundai से और चीन में BYD से है।
