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Numerology: एक-दूसरे को देखना भी पसंद नहीं करते ये 2 मूलांक वाले, स्वभाव में होता है जमीन-आसमान का फर्क

Published: Wed, 09 Sep 2026 05:40 PM (GMT+05:30)

अंक शास्त्र की दुनिया में दो ऐसे मूलांक हैं जिनकी दुश्मनी बेहद मशहूर है। ये दोनों ही एक दूसरे के ...और पढ़ें

कौन से हैं वो दो मूलांक? (AI-Generated Image)

कौन से हैं वो दो मूलांक? (AI-Generated Image)

HighLights

  1. मूलांक 4 राहु से प्रभावित, आजादी पसंद और त्वरित निर्णय लेने वाले

  2. मूलांक 8 शनि से शासित, अनुशासित और नियमों का पालन करने वाले

  3. आपसी समझ और लचीलेपन से इनके रिश्ते में संतुलन संभव

धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अंकशास्त्र में हर व्यक्ति की जन्म तारीख उसकी पूरी पर्सनैलिटी बयां कर सकती है। उसकी सोच, काम करने की शैली और व्यवहार का गहराई से विश्लेषण करती है। न्यूमेरोलॉजी में मूलांक 4 और मूलांक 8 की जोड़ी को सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माना गया है। इनके बीच अक्सर छोटी-छोटी बातों पर मतभेद और अनबन की स्थिति बन जाती है।

राहु बनाम शनि

इन दोनों मूलांकों की आपस में ज्यादा नहीं बनती पटरी न बैठने के पीछे उनके स्वामी ग्रहों का हाथ होता है:

मूलांक 4 (जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख पर जन्मे लोग)

अंक शास्त्र के हिसाब से मूलांक 4 का स्वामी ग्रह राहु है। ऐसे लोग लीक से हटकर सोचने वाले, आजादी पसंद और अचानक बड़े फैसले लेने वाले होते हैं।

मूलांक 8 (जन्म 8, 17 या 26 तारीख पर जन्मे लोग)

मूलांक 8 का स्वामी ग्रह शनि है। ऐसे लोग बेहद अनुशासित, गंभीर, मेहनती और नियमों का पालन करने वाले होते हैं। इनके लिए स्थिरता और प्लान के हिसाब से और तरीके से काम करना सबसे जरूरी होता है।

टकराव की असली वजह

मूलांक 4 को जहां हर काम में नए प्रयोग और तेजी पसंद होती है। वहीं, मूलांक 8 अनुशासन और नियमों पर जोर देता है। जब ये दोनों लव रिलेशनशिप, दोस्ती या बिजनेस पार्टनरशिप में साथ आते हैं, तो मूलांक 4 वालों को 8 वालों का सख्त रवैया कठोर लगता है। दूसरी ओर, मूलांक 8 वाले लोग 4 वालों के अचानक बदलने वाले फैसलों से चिढ़ जाते हैं।

रिश्ते में संतुलन बनाने के उपाय

अंक अलग होने के बावजूद इन दोनों मूलांक में आपसी समझ से रिश्ते को मजबूत बनाया जा सकता है:

  • मूलांक 4 वाले लोग थोड़ा धैर्य रखना सीखें और हर काम में जल्दबाजी न दिखाएं।
  • मूलांक 8 वालों को अपने स्वभाव में थोड़ा लचीलापन लाना चाहिए और नए विचारों को स्वीकार करना चाहिए।
  • एक-दूसरे की कमियां निकालने के बजाय उनकी ताकतों का सम्मान करें।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें।