नहाते या सोते समय उतारते हैं अंगूठी? कहीं आपकी ये आदत रत्न को बेअसर तो नहीं कर रही!
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रत्नों को लगातार पहनना चाहिए ताकि उनकी ऊर्जा का लाभ मिल सके। नहाते या काम करते ...और पढ़ें

ज्योतिषीय रत्नों को कब उतारना चाहिए? (Picture Credits- AI Images)
HighLights
रत्नों को लगातार पहनना ऊर्जा संचार के लिए महत्वपूर्ण।
नहाते समय कुछ रत्नों को पानी से बचाना चाहिए।
ज्योतिषी की सलाह पर ही रत्न उतारने का निर्णय लें।
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में रत्नों का संबंध ग्रहों से बताया गया है। माना जाता है कि सही रत्न पहनने से व्यक्ति की कुंडली में कमजोर ग्रह की स्थिति मजबूत होने लगती है। यही कारण है कि अधिकतर लोग अपने हाथों में अलग-अलग तरह के रत्न (Gemstone) पहनते हैं। रत्न शास्त्र की माने तो ग्रहों की स्थिति को ठीक करने के लिए सिर्फ रत्न पहन लेना ही सही नहीं माना जाता है, बल्कि इसे पहनने के बाद कुछ खास सावधानी भी रखनी जरूरी होती है।
रत्न सुंदर होने के साथ-साथ नाजुक भी होते हैं, जिनका ध्यान न रखने पर ये समय के साथ अपनी चमक खोने के साथ टूट भी सकते हैं। लोग रत्नों को ज्योतिषीय कारणों के साथ-साथ फैशन और स्टाइलिंग के लिए भी पहनते हैं। लेकिन एक सवाल अधिकतर लोगों के मन में रहता है कि क्या नहाते, सोते और काम करते समय रत्नों को पहनना सही है?
हमें रत्न कब उतारना चाहिए?
ज्योतिष और रत्न शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति को अपना रत्न तब तक नहीं उतारना चाहिए, जब तक आपको उससे नेगेटिविटी का एहसास न हो या फिर वह टूट न जाए।
कुछ रत्न काफी नाजुक होते हैं, जिनका ध्यान न रखने से वह समय के साथ अपनी ऊर्जा और चमक दोनों खो सकते हैं। ऐसे में अगर आप ज्योतिषी की सलाह पर कोई रत्न पहन रहे हैं, ताकि आप उसकी ऊर्जा का लाभ उठा सकें तो आपको रत्न बिल्कुल भी नहीं उतारना चाहिए।
रत्न पहनने से जुड़े नियम
रत्न शास्त्र में रत्नों को पहनने के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक यह है कि आप उन्हें सही वैदिक पूजा के साथ पहनें और बिना शुद्धिकरण प्रक्रिया किए उन्हें उतारकर दोबारा नहीं पहन सकते हैं।
इसलिए नहाते, सोते या काम करते समय रत्न की अंगूठी को नहीं निकालना चाहिए। हालांकि इस दौरान आप कुछ सावधानी जरूर बरत सकते हैं।
नहाते समय इस बात को पक्का करें लें कि साबुन या शॉवर जेल आपकी अंगूठी या ज्वेलरी से ठीक से धुल गया हो। इसके साथ ही नहाते समय माइल्ड साबुन का इस्तेमाल करें ताकि रत्न की चमक पर इसका असर न पड़ें।
कुछ रत्न जल-प्रतिरोधी यानी water resistant होते हैं, जबकि कुछ रत्न को पानी के संपर्क में बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए। हीरा, पन्ना, रूबी और नीलम रत्न के लिहाज से बेहद टिकाऊ होते हैं, जो पानी के संपर्क में आने से खराब नहीं होते हैं। जबकि ओपल, मोती या फिरोजा पत्थर पानी में खराब हो सकते हैं।
ओपल रत्न काफी ज्यादा पोरस होते हैं, जिसका मतलब वह पानी के संपर्क में आने से खराब हो सकते हैं और जेमस्टोन अपनी चमक खो सकते हैं या फिर उनमें दरार देखने को मिल सकती है। मोती भी काफी नाजुक होते हैं।
क्या रत्न को 24/7 पहना जा सकता है?
वैदिक ज्योतिष में माना जाता है कि रत्न एक बार निकल जाने के बाद वह उस तरह से काम नहीं करता है जैसे उन्हें करना चाहिए। रत्न एक बार निकल जाने के बाद एनर्जी के संचार में रुकावट पैदा करता है। इसलिए कहा जाता है कि अधिक से अधिक लाभ पाने के लिए रत्न को 24/7 पहनना चाहिए।
हालांकि गलती या किसी कारण से जेमस्टोन निकाल दिया है, तो घबराना नहीं चाहिए बल्कि आप इसे फिर से पहन सकते हैं और उसके बाद वही शुद्धिकरण प्रक्रिया कर सकते हैं, जो आपने पहले की थी।
अगर आपको ऐसा लगता है कि आपने जो रत्न पहना है, उससे वो फायदा मिल गया है, जो आप चाहते थे, तो आप कोई रत्न हमेशा के लिए पहनना बंद भी कर सकते हैं, हालांकि ऐसा करने से पहले आपको ज्योतिषी की सलाह जरूर लेनी चाहिए। हालांकि रत्न को जीवनभर पहनना कोई नुकसानदेह नहीं है। इस बात को याद रखें कि हर रत्न की एक निश्चित तारीख होती है, इसलिए उसे खास समय के साथ बदल दें।
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