एक अप्रैल को जीएसटी के इस युग में नए वित्तीय वर्ष की पहली सुबह के साथ ही सामान की अंतरराज्यीय ढुलाई के लिए ई-वे बिल अनिवार्य हो जाएगा। जहां जीएसटीएन इसे रोल-आउट करने के लिए तैयार है वहीं 1 फरवरी से मिली सीख भी उनके दिमाग़ में ज़रूर होगी, और यही वजह है कि इस बार फेज़्ड रोल-आउट की योजना बनाई गई है। जहां अंतरराज्यीय ई-वे बिल 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है, वहीं राज्यान्तरिक ई-वे बिल की शुरुआत 15 अप्रैल से होगी और इसके लिए भी 4 या 5 राज्यों को एक बारी में तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही, एनआईसी ने इस ढांचे को अपग्रेड किया है और ई-वे बिल पोर्टल पर कई टेस्ट किए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो, पोर्टल रोज़ाना 75 लाख ई-वे बिल संभाल सकता है, पहले यही संख्या 26 लाख थी।

अब 1 अप्रैल से शुरू हो रहे इस बिल के लिए सभी स्टेकहोल्डर्स जैसे सप्लायर, प्राप्तकर्ता और ट्रांसपोर्ट्स को तैयार होना है, जिसके लिए उन्हें इन बातों का ध्यान रखना होगा, जिससे वो बिना किसी परेशानी के साथ इस जीएसटी युग में आसानी से ई-वे बिल को अपना पाएं। आइये जानते हैं, एक डीलर या ट्रांसपोर्टर को किन 10 बातों का पता होना चाहिए।

1. अंतरराज्यीय माल की ढुलाई के लिए 1 अप्रैल 2018 से ई-वे बिल लागू हो रहा है। तब तक, ई-वे बिल को वॉलेंटरी तौर पर तैयार किया जा सकता है। आपको राज्यान्तरिक बिल के लिए चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि ये 15 अप्रैल से रोल-आउट हो रहा है। अपने राज्य की ई-वे बिल नोटिफिकेशन चैक करते रहें, जिससे आप राज्यान्तरिक ई-वे बिल के लिए खुद को तैयार कर सकें।

2. ई-वे बिल का रजिस्ट्रेशन ई-वे बिल पोर्टल पर किया जा सकता है। आप www.ewaybill.nic.in या www.ewaybillgst.gov.in पर जाकर अपने जीएसटीआईएन के ज़रिये रजिस्टर कर सकते हैं। इसके लिए आपको 1 अप्रैल 2018 का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है।

3. ई-वे बिल सिर्फ़ तभी तैयार करने की ज़रूरत है, जब कंसाइनमेंट 50 हज़ार से ज़्यादा का हो, जिसमें टैक्स शामिल हो, लेकिन इसमें छूट प्राप्त सामान की कीमत जुड़ी नहीं होनी चाहिए।

4. अगर कंसाइनमेंट की कीमत 50 हज़ार से कम हो तो, ऐसे में ई-वे बिल तैयार करने की ज़रुरत नहीं है, भले ही एक ही बारी में ट्रांसपोर्ट किए जा रहे इस तरह के कई कंसाइनमेंट की कुल कीमत 50 हज़ार से ज़्यादा हो।

5. 100 किमी तक की दूरी के लिए, ई-वे बिल की वैद्यता एक दिन की होगी(आकार में बड़े कार्गो के लिए 20 किमी), उसके बाद हर 100 किमी के लिए एक अतिरिक्त दिन की वैद्यता होगी।

6. अगर सप्लायर के कारोबार की जगह से ट्रांसपोर्टर के कारोबार की जगह की दूरी, या ट्रांसपोर्टर के कारोबार की जगह से प्राप्तकर्ता की जगह की दूरी 50 किमी से कम है, ई-वे बिल का पार्ट-बी, ऐसे में ढुलाई के साधन का विवरण देना ज़रूरी नहीं है। आसान शब्दों में कहा जाए तो, अगर दूरी 100 किमी से कम हो तो आपको ई-वे बिल में ढुलाई के साधन का विवरण देना अनिवार्य नहीं।

7. प्राप्तकर्ता के लिए कंसाइनमेंट की स्वीकृति या अस्वीकृति दर्ज कराने की समय सीमा, डिलिवरी से पहले या 72 घंटे है। जिसके बाद प्राप्तकर्ता के पास कंसाइनमेंट को अस्वीकार करने का कोई विकल्प नहीं होगा।

8. अगर सामान को जॉब-वर्क के तौर पर पहुंचाया जा रहा है, ऐसे में सप्लायर या रजिस्टर्ड जॉब-वर्कर को ई-वे बिल तैयार करना होगा।

9. एक सप्लायर अपनी जगह ई-वे बिल का पार्ट-ए भरने के लिए ट्रांसपोर्टर, या कोरियर एजेंसी या ई-कॉमर्स ऑपरेटर को अधिकृत कर सकता है।

10. जहां सामान रेलवे या हवाई या वेसल के ज़रिये ट्रांसपोर्ट किया जाएगा, ऐसे में ई-वे बिल सिर्फ रजिस्टर्ड सप्लायर या प्राप्तकर्ता द्वारा तैयार किया जाएगा। इसमें ट्रांसपोर्टर ई-वे बिल तैयार नहीं कर सकता। हालांकि, ई-वे बिल सामान की डिलिवरी के वक़्त तैयार करना होगा।

उपरोक्त दिए गए सभी नियम डीलरों और ट्रांसपोर्टरों के लिए जानना बेहद ज़रूरी है, ये नियम ई-वे बिल रोल-आउट को आपके लिए और भी आसान बना देगा। इसके ज़रिये राज्यों की सीमा पर होने वाली टैक्स चोरी को रोका जा सकेगा, साथ ही ये देशभर में व्यापार को आसानी से बढ़ने का मौका देगा। अगर आप भी ई-वे बिल प्रबंधन की इस प्रक्रिया को आसान बनाना चाहते हैं तो Tally.ERP 9 जैसे प्रख्यात जीएसटी सॉफ्टवेयर की मदद ले सकते हैं। इन्होंने ई-वे बिल से जुड़े फीचर्स ई-वे बिल रोल-आउट से पहले ही मार्केट में पहुंचाए हैं, जो देशभर के कारोबारियों की पहली पसंद बन चुका है।

Posted By: Tilak Raj

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