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रोहिंग्या समुदाय के सामने अस्तित्व का संकट

राष्ट्रीय | Tue, 19 Sep 2017 03:29 PM (IST)

रोहिंग्या समुदाय आज दुनिया के लिए चिंता का सबब बने हुए हैं। म्यांमार शासन से बचने-बचाने से लेकर दूसरे देश में शरण पाने की फिक्र हो या अस्तित्व बचाने से लेकर भविष्य का सवाल रोहिंग्या समुदाय के सामने आज अंधेरा ही अंधेरा है। आइए जानते हैं रोहिंग्या संकट क्या है। बर्मा (म्यांमार) के अराकान प्रांत में 1400 ईस्वी में भारतीय उपमहाद्वीप से रोहिंग्या समुदाय आ बसे थे। अराकान प्रांत म्यांमार के पश्चिम और बांग्लादेश के पूरब में स्थित है।1430 ईस्वी में अराकान का शासक बौद्ध राजा नारमीखला ने इन्हे शरण दिया था। उनके दरबार में ये समुदाय नौकरी-चाकरी और मजदूरी करने लगे। लेकिन जब हिन्दुस्तान में मुगलों का शासन कायम हुआ तो इन रोहिंग्या समुदाय के दिन बदलने लगे। इन्होंने अपने इलाके में मुगलों की तर्ज पर शुरू किया। इस तरह जब भारत में मुगल थे तो अराकान में रोहिंग्या।

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