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प्रशासन की होशियारी कर्मचारियों पर भारी

Publish Date:Tue, 21 Mar 2017 01:01 AM (IST) | Updated Date:Tue, 21 Mar 2017 01:01 AM (IST)
प्रशासन की होशियारी कर्मचारियों पर भारीप्रशासन की होशियारी कर्मचारियों पर भारी
गौरव पांडेय, रुद्रपुर : जिला प्रशासन स्तर पर हुई चूक और नगर निगम की लापरवाही से 82 संविदा सफाई कर

गौरव पांडेय, रुद्रपुर : जिला प्रशासन स्तर पर हुई चूक और नगर निगम की लापरवाही से 82 संविदा सफाई कर्मियों के नियमितीकरण के मामले में पेच फंसा रहा। निगम के पास वित्तीय अधिकारी होने के बावजूद प्रशासन ने कमेटी में कोषाधिकारी को बैठा दिया गया। जबकि जीओ में साफ तौर पर निगम के वित्तीय अधिकारी के आदेश थे। कोषाधिकारी ने भी जीओ का हवाला देते हुए कमेटी में शामिल होने से ही इन्कार कर दिया। इस तरह नियमितीकरण की फाइल लंबे समय तक लटकी रही। नतीजन गुस्साए कर्मी कानून तोड़कर हड़ताल में कूद पड़े और हाईकोर्ट को दखल देना पड़ा। इसका खामियाजा जनता को भी भुगतना पड़ा। कई दिनों तक गली-मोहल्ले गंदगी से बजबजाते रहे। एक नीतिगत मसले पर हुई इस चूक से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पिछले साल 23 नवंबर को निगम के संविदा कर्मियों के नियमितीकरण आदेश जारी हुए थे। जीओ के अनुसार कमेटी में नगर निगम के मुख्य नगर अधिकारी, वित्तीय अधिकारी, उपनगर या सहायक नगर अधिकारी के साथ ही जिला प्रशासन द्वारा नामित एडीएम या सीडीओ स्तर के अधिकारी को शामिल किया जाना था। एक माह बाद भी कमेटी गठन की सुगबुगाहट नहीं हुई तो कर्मचारी भी मुखर हुए। इस बीच आचार संहिता लगने पर सरकारी मशीनरी चुनाव में व्यस्त हो गई। मतदान निपटने के बाद कर्मचारियों ने फिर निगम व जिला प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।

इस बीच प्रशासन ने हड़बड़ी में कर्मियों के नियमितीकरण के लिए कमेटी गठित कर दी। कमेटी में नगर निगम के वित्तीय अधिकारी को दरकिनार रख कोषाधिकारी को शामिल किया गया। कमेटी में शामिल अन्य सदस्यों के बाद स्वीकृति के लिए फाइल कोषाधिकारी के पास पहुंची तो उन्होंने जीओ का हवाला देते हुए साफ इन्कार कर दिया। इसके बाद गुस्साए संविदा कर्मी सात मार्च को आचार संहिता तोड़कर आंदोलन में कूद पड़े। 14 मार्च को स्थायी कर्मी भी समर्थन में हड़ताल में शामिल हो गए। इससे शहर की सफाई व्यवस्था पटरी से उतर गई। हाईकोर्ट को नागरिक सुविधाओं को देखते हुए मामले में दखल देना पड़ा। हाईकोर्ट के सख्त फरमान के बाद सफाई कर्मियों के तेवर ढीले पड़े और 17 मार्च को काम पर लौटे।

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पक्का होने की आस में पांच की मौत, एक का इस्तीफा

रुद्रपुर : सेवा नियमावली के अनुसार नगर निगम के 82 संविदा सफाई कर्मियों को नियमित किया जाना था। पहले सरकार स्थाईकरण की फाइल को दबाए रही। कर्मचारियों के बीच विरोध के स्वर और चुनाव को पास आता देखकर सरकार ने जीओ जारी कर मुहर लगाई। जीओ जारी होने के बाद फाइल जिला प्रशासन की मेज पर फंस गई। इस दौरान स्थाई होने का इंतजार करते-करते पांच कर्मचारियों की मौत हो गई। जबकि एक कर्मचारी नौकरी छोड़कर चला गया।

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प्रशासन ने सुधारी भूल

रुद्रपुर : चूक पकड़ में आने के बाद प्रशासन ने सुधार किया है। जिलाधिकारी ने अब पूर्व आदेश में संशोधन के साथ कमेटी गठित करने के निर्देश जारी किए हैं। कमेटी में कोषाधिकारी के स्थान पर निगम के लेखाधिकारी को शामिल किया है। तकनीकी अड़चन के सुलझाने से संविदा कर्मियों के नियमितीकरण का रास्ता भी साफ हो गया है।

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लिपिकीय त्रुटि के चलते कमेटी गठन आदेश में नगर निगम वित्तीय अधिकारी के स्थान पर कोषाधिकारी हो गया था। इससे फाइल को कोषाधिकारी से स्वीकृति नहीं मिली और मामला लटका रहा। चूक सामने आने के बाद सुधार कर लिया है। जांच-पड़ताल आदि औपचारिकता के बाद संविदा कर्मी जल्द नियमित होंगे।

-चंद्रेश कुमार, जिलाधिकारी, यूएसनगर

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आचार संहिता को लेकर विलंब हुआ। अब कमेटी बदलकर फाइल एडीएम प्रशासन को भेज दी है। जल्द ही इस मामले में निर्णय लिया जाएगा।

-दीप्ति वैश्य, नगर आयुक्त, रुद्रपुर

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    Web Title:(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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