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मजदूरों के बच्चों के भविष्य के सपने को बुन रही सपना

Publish Date:Fri, 19 May 2017 02:08 PM (IST) | Updated Date:Sat, 20 May 2017 05:04 AM (IST)
मजदूरों के बच्चों के भविष्य के सपने को बुन रही सपनामजदूरों के बच्चों के भविष्य के सपने को बुन रही सपना
कोटद्वार के ग्राम बालासौड़ निवासी सपना रौथाण नेगी गरीब मजूदरों के बच्चों को शिक्षित करने में जुटी है। ग्राम बलभद्रपुर में 'अपनी पाठशाला' के माध्यम से ऐसे बच्चों को जोड़ा है।

कोटद्वार, [अजय खंतवाल]: नदियों में तपती रेत-बजरी के थपेड़ों के बीच झुलसता बचपन और दिलोदिमाग में सिर्फ दो जून की रोटी के इंतजाम की चिंता। अपने आसपास के घरों से कंधे पर बस्ता टांगे स्कूल जाते बच्चों को देख इच्छा तो होती है कि हम भी स्कूल जाएं, लेकिन फिर रोटी का क्या होगा।

यह व्यथा है पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए उन मजदूर परिवार के बच्चों की, जो रोटी की खातिर परिजनों के साथ कोटद्वार क्षेत्र की नदियों में खनन कार्य कर रहे हैं। इन्हीं बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयास में जुटी है कोटद्वार के ग्राम बालासौड़ निवासी सपना रौथाण नेगी। 

ग्राम बलभद्रपुर में 26 मार्च 2016 से शुरू की गई 'अपनी पाठशाला' के माध्यम से सपना व उसकी टीम झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले ऐसे बच्चों को आखर ज्ञान दे रही है। ये बच्चे शाम पांच से सात बजे तक अपनी पाठशाला में पहुंच कर आखर ज्ञान के साथ ही कंप्यूटर की शिक्षा भी लेते हैं। 

20 बच्चों से शुरू हुई इस पाठशाला में अब 45 बच्चे अध्ययनरत हैं। बच्चों को पठन सामग्री के साथ ही नाश्ते की व्यवस्था भी सपना व उसकी टीम ही करती है। 

सपना बताती है कि पाठशाला में आने वाले कई बच्चे इस कदर होनहार हैं कि उन पर अधिक मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ रही। ऐसे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले, इसके लिए उसने क्षेत्र के कुछ निजी विद्यालयों के प्रबंधकों से भी बात की है। 

इन विद्यालयों में बच्चों को 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' के तहत प्रवेश दिलाया जाएगा। बताया कि विद्यालय प्रबंधकों ने बच्चों की पढ़ाई का पूरा जिम्मा उठाने का भी निर्णय लिया है। पाठशाला के संचालन में सपना के पति मनोज नेगी, शिक्षक संतोष नेगी, सोनू नेगी व पायल ठाकुर बराबर सहयोग कर रहे हैं।

सर्द मौसम में आया शिक्षा का विचार

दिसंबर-जनवरी की कंपकंपी के दौरान झुग्गी-झोपड़ियों में गर्म वस्त्र बांटने के दौरान मनोज व सपना के मन में इन बच्चों को शिक्षित करने का विचार आया। दोस्तों के साथ बातचीत की और फिर शुरू हुई पाठशाला के ठौर की तलाश। ऐसे में बलभद्रपुर निवासी राजीव गौड़ ने युवाओं की इस पहल को स्वागत करते हुए अपने आवास का एक बड़ा हॉल अपनी पाठशाला के लिए दे दिया। तब से यहीं पाठशाला चल रही है।

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Web Title:Sapna Teach the Poor children at Kotdwar(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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