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उत्‍तराखंड में प्लास्टिक व पॉलीथिन उत्पादन इकाइयां बंद करने के आदेश

Publish Date:Sat, 18 Mar 2017 10:21 AM (IST) | Updated Date:Sun, 19 Mar 2017 05:00 AM (IST)
उत्‍तराखंड में प्लास्टिक व पॉलीथिन उत्पादन इकाइयां बंद करने के आदेशउत्‍तराखंड में प्लास्टिक व पॉलीथिन उत्पादन इकाइयां बंद करने के आदेश
नैनीताल हाई कोर्ट ने उत्तराखंड को पॉलीथिन फ्री बनाने के लिए राज्य में प्लास्टिक व पॉलीथिन उत्पादन इकाइयों को बंद करने के आदेश पारित कर दिए हैं।

नैनीताल, [जेएनएन]: गोमुख से गंगा सागर तक गंगा की अविरल धारा बहती रहे, इसके लिए हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने उत्तराखंड को पॉलीथिन फ्री बनाने के लिए राज्य में प्लास्टिक व पॉलीथिन उत्पादन इकाइयों को बंद करने के आदेश पारित कर दिए हैं। साथ ही राज्य में कैरी बैग व थर्माकॉल आदि की आमद न हो सके इसके लिए एंट्री प्वाइंट पर चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं।
हरिद्वार निवासी ललित मिगलानी की जनहित याचिका पर वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा व न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते पिछली सुनवाई में 26 बिंदुओं पर आदेश पारित किए थे। याचिकाकर्ता ने हाल ही में कोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने का उल्लेख करते हुए फिर प्रार्थना पत्र दाखिल किया। इसके बाद ही कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव, केंद्रीय जल संसाधन सचिव समेत सभी जिलों के जिलाधिकारियों को तलब कर लिया था।
शुक्रवार को केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि केंद्र ने नेशनल मिशन फॉर गंगा के तहत 662 करोड़ मंजूर कर दिए हैं। वहीं राज्य सरकार ने बताया कि गंगा के पांच सौ मीटर दायरे में शौच व थूकने के अलावा दो किमी दायरे में उद्योग लगाने पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश व गंगोत्री में एक हजार शौचालय बनाने को कहा गया है। 
शुक्रवार को राज्य के देहरादून जिले को छोड़कर अन्य सभी 12 जिलों के जिलाधिकारियों के साथ ही केंद्रीय व राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के अधिकारी हाई कोर्ट में पेश हुए। इस दौरान दून के डीएम व मुख्य सचिव की ओर से पेशी पर छूट देने संबंधी प्रार्थना पत्र दिया गया, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। खंडपीठ ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड बनाने के सख्त आदेश दिए। 
राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता परेश त्रिपाठी, केंद्र की ओर से असिस्टेंट सॉलीसिटर जनरल राकेश थपलियाल, ललित शर्मा व संजय भट्ट, पीसीबी की ओर से अमन रब की ओर से गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कोर्ट ने अब इस मामले में मुख्य सचिव व जिलाधिकारियों को व्यक्तिगत पेशी से छूट प्रदान कर दी है। 
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया
  •  उत्तराखंड एंटी लिटरिंग एंड स्पीटिंग एक्ट-2016 बना दिया गया है।
  • गंगा नदी के दोनों ओर पांच सौ मीटर दायरे में थूकने पर पाबंदी लगा दी गई है।
  • गंगा के दो किमी दायरे में उद्योग लगाने पर प्रतिबंध
  • चार धाम यात्रा मार्ग पर तीन हजार की आबादी वाले क्षेत्र में प्लास्टिक की बोतल व प्लास्टिक निर्मित सामान को नष्ट करने के लिए क्रॉसिंग यूनिट (प्लास्टिक नष्ट करने वाल मशीन) लगाई जाएंगी। 
  • भारत हैवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड नौ माह के भीतर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण पूरा कर लेगा
कोर्ट के आदेश
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ करे कार्रवाई
  •  राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने कहा कि क्यों न पीसीबी को ही खत्म कर दिया जाए
  • जिलाधिकारियों को निकाय व पंचायत में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बनाने व इन संस्थाओं को नोटिस देकर इस संबंध में आदेश के अनुपालन करवाने का अधिकार होगा।
पीसीबी ने दिया ब्योरा
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपने बचाव में कोर्ट को बताया कि गंगा में प्रदूषण फैलाने पर 180 इकाइयों को नोटिस थमाया गया। इसके बाद 104 नोटिस वापस ले लिए। इसके अलावा 41 उद्योग बंद किए गए। तीन के खिलाफ कार्रवाई के लिए अदालत में आग्रह किया गया। 32 फैक्ट्रियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। 

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Web Title:High court order to close plastic and polythene production units in Uttarakhand(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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