23 अफसर आइटीबीपी की मुख्यधारा में शामिल

Publish Date:Wed, 04 Sep 2013 08:19 PM (IST) | Updated Date:Thu, 05 Sep 2013 02:41 AM (IST)
23 अफसर आइटीबीपी की मुख्यधारा में शामिल

जागरण प्रतिनिधि, मसूरी: 25 माह का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 23 कैडेट्स बतौर सहायक सेनानी भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आइटीबीपी) की मुख्य धारा में शामिल हुए। आइटीबीपी अकादमी परेड ग्राउंड में आयोजित पासिंग आउट परेड में नवसैन्य अधिकारियों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने की शपथ ली। अकादमी के निदेशक आइजी हरभजन सिंह ने पासिंग आउट परेड की सलामी ली। पीपिंग सेरेमनी में पासआउट होने वाले अधिकारियों के कंधों पर उनके परिजनों और आइटीबीपी के अधिकारियों ने सितारे सजाये। परेड का नेतृत्व प्रशांत कुमार सिन्हा ने किया।

अकादमी के निदेशक आइजी हरभजन सिंह ने परेड का निरीक्षण किया और सलामी ली। उन्होंने नवसैन्य अधिकारियों से पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा से कर्तव्य का निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आइटीबीपी केवल 3488 किमी लंबी भारत-चीन सीमा की रखवाली ही नहीं करता, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाता है। उपनिदेशक अकादमी डीआइजी प्रेम कुमार धस्माना ने कहा कि सभी अधिकारियों ने कड़ा प्रशिक्षण लिया है, जो देश की रक्षा के काम आएगा।

इस दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सहायक सेनानी प्रशांत कुमार सिन्हा को ओवरआल बैस्ट ट्रेनी, महावीर सिंह को बेस्ट इनडोर ट्रेनी और देहरादून निवासी सुमित गुसार्ई को बेस्ट आउटडोर ट्रेनी के पुरस्कार से नवाजा गया। इस मौके पर आइटीबीपी नार्दर्न फ्रंटियर के आइजी इंदर सिंह नेगी, सेवानिवृत कमाडेंट वीएस वर्मा, पालिकाध्यक्ष मनमोहन सिंह मल्ल, सेनानी प्रशिक्षण शांडिल्य कुमार, सेनानी प्रशासन अनिल कुमार फूल व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

पास आउट होने वाले अधिकारी बिहार-6, उत्तराखंड-5, राजस्थान-3, उत्तर प्रदेश-3, हरियाणा-2, दिल्ली-1, झारखंड-1, जम्मू कश्मीर-1, पश्चिम बंगाल-1

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युवाओं को देश की रक्षा के लिए सेना में शामिल होना चाहिए। छात्र जीवन से ही मेरी इच्छा सेना का हिस्सा बनने की थी। आज मेरा और मेरा माता-पिता का सपना साकार हो गया है, लेकिन मुझे देश के लिए अभी काफी कुछ करना है।

-सुमित गुसाई, बेस्ट आउटडोर ट्रेनी के अवार्ड से सम्मानित, निवासी देहरादून

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मुझे अपने परिजनों से सेना में शामिल होने की प्रेरणा मिली। अब कुछ कर दिखाने का समय आ गया है। चीन यदि आज आंख दिखा रहा है तो भारत उसकी इस आंख को निकालने की हिम्मत रखता है।

-प्रशांत कुमार सिन्हा, ओवरऑल बेस्ट ट्रेनी के अवार्ड से सम्मानित, निवासी पटना

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