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चेतन ऋषि बने वाल्मीकि आश्रम के महंत

मोरना : तीर्थनगरी शुक्रताल स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के संस्थापक संत मोहन ऋषि महाराज की षोड्सी पर

By Edited By: Published: Wed, 20 May 2015 09:05 PM (IST)Updated: Wed, 20 May 2015 09:05 PM (IST)
चेतन ऋषि बने वाल्मीकि आश्रम के महंत

मोरना : तीर्थनगरी शुक्रताल स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के संस्थापक संत मोहन ऋषि महाराज की षोड्सी पर आयोजित सभा में दूरदराज क्षेत्रों से आए सैकड़ों संतों व श्रद्धालुओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान चेतन ऋषि को पगड़ी पहनाकर आश्रम का महंत बनाया गया।

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सभा में ऋषिकेश से पधारे धर्म ऋषि महाराज ने कहा कि ब्रह्मालीन संत मोहन ऋषि महाराज वर्ष 1969 में गुरु इतवारी लाल से दीक्षा लेकर शुक्रताल आ गए थे और महर्षि वाल्मीकि आश्रम की स्थापना कर पूजा पाठ साधना में लगे रहे। स्वामी सूर्यानंद महाराज जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मालीन संत मोहन ऋषि ने अपना जीवन समाज को दिशा देने में लगाया है। सभा को स्वामी मुकंद ऋषि, राजपाल ब्रह्माचारी, गरीबदास महाराज, प्रेमनाथ महाराज, सपा अनुसूचित प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष नरेंद्र प्रमुख, सपा के प्रदेश सचिव भारत भूषण, भाजपा किसान मोर्चा के डा. वीरपाल निर्वाल, प्रधान र¨वद्र बेनिवाल, प्रमुख मायादेवी, राजाराम शास्त्री, कस्तूर ¨सह स्नेही, प्रधान नीरज रायल शास्त्री आदि ने भी संबोधित किया गया। इस दौरान सर्व सम्मति से बाबा के ज्येष्ठ पुत्र चेतन ऋषि शास्त्री को पगड़ी बनाकर आश्रम का महंत बनाया गया। आश्रम के उप संचालक नरेंद्र ऋषि, केशोराम पार्चा, सूबे¨सह, नानक चंद, हरिओम भाटिया, प्रधान महक ¨सह, ¨पटू आदि मौजूद रहे।


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