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वृंदावन में यमुना रिवर फ्रंट घोटाला

Publish Date:Tue, 04 Apr 2017 07:09 PM (IST) | Updated Date:Tue, 04 Apr 2017 07:09 PM (IST)
वृंदावन में यमुना रिवर फ्रंट घोटालावृंदावन में यमुना रिवर फ्रंट घोटाला
कार्तिकेय नाथ द्विवेदी, मथुरा गोमती रिवर फ्रंट की न्यायिक जांच के आदेश के बीच वृंदावन के यमुना

कार्तिकेय नाथ द्विवेदी, मथुरा

गोमती रिवर फ्रंट की न्यायिक जांच के आदेश के बीच वृंदावन के यमुना रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट में भी घोटाले की सुरंग दिखाई देने लगी है। यहां बिना टेंडर 177.81 करोड़ रुपये की योजना पर काम शुरू कराया गया। पर्यावरण जैसी अहम मंजूरी भी नहीं ली गई। शीट पाइलिंग के साथ रिवर बेड में नाला बना 40 करोड़ खर्च कर दिए। अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और हाईकोर्ट ने कार्य पर रोक लगा रखी है, जिससे नदी के पर्यावरण को भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

गोमती रिवर फ्रंट में गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसी तर्ज पर वृंदावन में भी यमुना रिवर फ्रंट संवारने की योजना सपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई थी। इसमें सबसे बड़ी गड़बड़ संबंधित विभागों की आपत्ति को लेकर की गई। सूत्रों के मुताबिक कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने टेंडर कराए बिना ही इसे मेरठ की एक कंपनी को दे दिया। मई 2016 में उसने बड़े पैमाने पर वहां जेसीबी और अन्य मशीनें लगाकर काम शुरू करा दिया। यही नहीं पर्यावरण विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिए, जबकि काम शुरू करने से पहले हर हाल में सिंचाई विभाग के अफसरों को एनओसी लेनी चाहिए थी।

सितंबर तक कार्य पर तकरीबन 40 करोड़ रुपये खर्च हो गए। बिना पर्यावरण मंजूरी के कार्य कराने पर एनजीटी में पर्यावरणप्रेमी आकाश वशिष्ठ की ओर से याचिका दाखिल कर दी गई। याचिका में कहा गया कि यमुना के रिवर बेड में गलत तरीके से नाला बनाया जा रहा है, जो नदी को व्यापक क्षति पहुंचाएगा। अदालत ने इस पर सितंबर 2016 में स्थगन आदेश जारी कर दिया। इस बीच महंत मधुमंगलशरण दास ने भी हाईकोर्ट में एक याचिका कर दी। इसमें कहा गया कि रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट के तहत केसीघाट से मदन मोहन मंदिर तक तकरीबन दो किमी के दायरे में पुराने घाटों का सुंदरीकरण कराया जाना है। केसीघाट से कार्य स्थल की दूरी महज 44 मीटर है, जबकि 100 मीटर तक निर्माण एएसआइ की अनुमति के बिना नहीं हो सकता। इसके बाद हाईकोर्ट ने भी स्टे दे दिया।

अब तक डेढ़ किमी के दायरे में नाले का कार्य हो चुका है। वही, शीट पाइ¨लग का कार्य तकरीबन तीन सौ मीटर दायरे में ही हो पाया है। इस बारे में जानकारी करने पर ¨सचाई विभाग के एक्सईएन एसके गोयल ने बताया कि आगरा मंडल के कमिश्नर ने लिखित में हाईकोर्ट में यह बता दिया कि केसीघाट पर जहां निर्माण कार्य हो रहा है, उसका पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारक से कोई लेना-देना नहीं है। लिहाजा, निर्माण के लिए एएसआइ से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।

वृंदावन रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट

लागत-178 करोड़ रुपये

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कहां से कहां तक होना था काम

कार्य केसीघाट के समीप से लेकर मदन मोहन मंदिर तक तकरीबन दो किमी दायरे में कराया जाना था।

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कब होना था पूरा

विस चुनाव से पहले दिसंबर 2016 तक

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सरकार की गड़बड़ी

-सिंचाई विभाग को तत्कालीन सपा सरकार ने डीपीआर की मंजूरी और पैसा देने में देरी नहीं की। यह भी नहीं देखा कि एनओसी है कि नहीं।

-अफसरों ने वृंदावन की जनता के समक्ष प्रेजेंटेशन भी नहीं कराया।

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क्या काम होने हैं

- पुराने घाटों की मरम्मत।

- नए घाटों का निर्माण और यमुना के एक तरफ समानांतर नाले का निर्माण।

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गुणवत्ता जांच से डरे हैं अधिकारी

गोमती रिवर फ्रंट की जांच के बाद यहां भी अधिकारी डरे हुए हैं। उन्हें भय है कि काम की मंजूरी के साथ गुणवत्ता की भी जांच न करा ली जाए। कार्यदाई संस्था के जूनियर इंजीनियर एके वाजपेयी के अनुसार वृंदावन रिवर फ्रंट की बारी भी आ सकती है, लेकिन यहां कार्य की गुणवत्ता ठीक है।

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    Web Title:(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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