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यूपी के अस्पतालों में मौतों पर अब नहीं होगी प्रशासनिक जांच

Publish Date:Sat, 09 Sep 2017 08:15 PM (IST) | Updated Date:Sat, 09 Sep 2017 08:15 PM (IST)
यूपी के अस्पतालों में मौतों पर अब नहीं होगी प्रशासनिक जांचयूपी के अस्पतालों में मौतों पर अब नहीं होगी प्रशासनिक जांच
उत्तर प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में मौतों की प्रशासनिक जांच कतई नहीं कराई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल भेजा जाएगा।

लखनऊ (जेएनएन)। गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के बाद शासन ने खुद जिला प्रशासन को जांच सौंप कर मनमाफिक रिपोर्ट पाई थी लेकिन, फर्रुखाबाद के आरएमएल जिला महिला अस्पताल में ऐसी ही घटना पर जिला प्रशासन ने खुद जांच कर राज्य सरकार के लिए विषम परिस्थिति खड़ी कर दी। इससे सबक लेते हुए सरकार ने अब तय किया है कि प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में मौतों की प्रशासनिक जांच कतई नहीं कराई जाएगी। इसके लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल भेजा जाएगा।

फर्रुखाबाद के सरकारी अस्पताल में एक महीने के भीतर 49 बच्चों की मौत के लिए जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए जिले के सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) व अस्पताल के सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) के खिलाफ एफआइआर दर्ज करा दी थी। चूंकि इसके कुछ ही दिन पहले गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत को लेकर खासा हंगामा खड़ा हुआ था, इसलिए लगातार दूसरे महीने में फिर ऐसी घटना होने और फर्रुखाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा ऑक्सीजन की कमी बताए जाने ने सरकार को चौकन्ना कर दिया था।

इसी के बाद शासन ने चार सितंबर को चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक की जांच टीम को तथ्यात्मक व तकनीकी जांच के लिए फर्रुखाबाद भेजा था। यह रिपोर्ट पिछले दिनों शासन को सौंप दी गई थी लेकिन अधिकारिक तौर पर अब तक शासन में न तो इस रिपोर्ट का अध्ययन-परीक्षण किया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। शनिवार को शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट का अध्ययन सोमवार को किया जाएगा।

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यह है रिपोर्ट में

स्वास्थ्य महानिदेशालय के निदेशक व संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारियों की जांच रिपोर्ट पढ़ चुके अधिकारियों ने बताया कि फर्रुखाबाद के जिला प्रशासन ने सीएमओ व सीएमएस के खिलाफ जो एफआइआर दर्ज कराई है, उसका कोई आधार जांच में नहीं पाया गया है। इस एफआइआर को जिलाधिकारी की गलती माना गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 49 बच्चों में से 19 की मौत पैदा होने से पहलेे ही (स्टिल बॉर्न) हो गई थी, जबकि अस्पताल में जन्म लेने वाले 468 बच्चों में छह की मौत गले में आहार नली (कॉर्ड) फंसने से हुई। इसके अलावा अन्यत्र प्रसव होने के बाद गंभीर स्थिति में अस्पताल लाए गए 145 बच्चों में से जिन 24 का वजन बेहद कम था, उनकी मौत कमजोरी की वजह से हुई। रिपोर्ट के मुताबिक न तो ऑक्सीजन की कमी की बात पाई गई और न ही डॉक्टरों की लापरवाही सिद्ध हुई है। जांच रिपोर्ट में फर्रुखाबाद के सिटी मजिस्ट्रेट को भी फोन से मजिस्ट्रेट जांच करने और मनमाना गलत निष्कर्ष निकालने का दोषी माना गया है। सिटी मजिस्ट्रेट पर मुख्य सचिव के स्तर से कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है। शासन के निर्देश पर रिपोर्ट में यह संस्तुति भी शामिल की गई है कि भविष्य में किसी भी अस्पताल में ऐसे मामलों पर प्रशासनिक जांच की बजाए मेडिकल पैनल गठित कर ही जांच कराई जाएगी।

 

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Web Title:No administrative investigations on deaths in UP hospitals(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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