गर्भ में भ्रूण हत्या करने वाले समाज के कलंक

Publish Date:Mon, 17 Jul 2017 01:02 AM (IST) | Updated Date:Mon, 17 Jul 2017 01:02 AM (IST)
गर्भ में भ्रूण हत्या करने वाले समाज के कलंकगर्भ में भ्रूण हत्या करने वाले समाज के कलंक
जागरण संवाददाता, कानपुर : गर्भ में भ्रूण की हत्या करने वाले लोग समाज के लिए कलंक हैं। मां की कोख में

जागरण संवाददाता, कानपुर : गर्भ में भ्रूण की हत्या करने वाले लोग समाज के लिए कलंक हैं। मां की कोख में संतान की हत्या कर उसे कत्लखाने के रूप में परिवर्तित करने वाले लोग मानवता के कलंक हैं। गर्भ में कन्या की हत्या, गौ हत्या से कई गुना ज्यादा घातक हैं। ये बातें जैन मुनि कमल मुनि कमलेश ने जैन स्थानक आनंदपुरी में आयोजित सत्संग में कही।

उन्होंने कहा कि गर्भ में पल रही पवित्र आत्मा का कत्ल करना साक्षात मां लक्ष्मी, मां सरस्वती और मां दुर्गा का कत्ल करने के समान है। गर्भ में कन्या का कत्ल करने वालों को कठोर दंड मिलना चाहिए। भ्रूण हत्या मातृत्व की हत्या के समान है। ऐसे व्यक्ति को इंसान कहने का अधिकार नहीं है। आज हर क्षेत्र में नारी ने पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाया है। लिंग के आधार पर भेदभाव घोर पाप है। लड़की दो घरों को रोशन करती है। बेटी को पराया धन कहना, बेटी को बोझ मानना बहुत ही गलत है। लिंगानुपात के असंतुलन से सामाजिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। अब जगह- जगह पालना घर बनाने की जरूरत है। नारे और प्रचार के जरिये कन्या को गर्भ में मारने से नहीं रोका जा सकता है। अब गर्भ में भ्रूण हत्या रोकने को वैचारिक क्रांति की आवश्यकता है। इस अवसर पर कौशल मुनि महाराज और घनश्याम मुनि जी महाराज उपस्थित रहे।

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