गाड़ियों में प से प्रदूषण, ल से लापरवाही फार्मूला

Publish Date:Mon, 14 Nov 2016 12:50 AM (IST) | Updated Date:Mon, 14 Nov 2016 12:50 AM (IST)
गोंडा: प्रदूषण भले ही देश के लिए बडी समस्या बन गई हो, दिल्ली व लखनऊ जैसे महानगर इसकी चपेट में आ गये

गोंडा: प्रदूषण भले ही देश के लिए बडी समस्या बन गई हो, दिल्ली व लखनऊ जैसे महानगर इसकी चपेट में आ गये हैं लेकिन जिले में इसको लेकर कोई तैयारी नहीं है। यहां अफसरों के उदासीन रवैये के चलते दो लाख से अधिक वाहन बिना प्रदूषण जांच के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इनकी पहचान करके कार्रवाई करने में परिवहन विभाग से पुलिस महकमे तक सब चुप हैं, जबकि वाहनों की अंधाधुंध दौड ने यहां भी स्मॉग के हलात पैदाकर दिया हैं।

आबादी बढने के साथ ही जिले में वाहनों की संख्या में इजाफा हुआ है। यहां मौजूदा समय में दो लाख 70 हजार के करीब वाहन सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इनमें दो लाख दस हजार मोटर साइकिल समेत अन्य वाहन बिना प्रदूषण जांच कराये ही सड़कों पर दौड़ लगा रहे हैं। परिवहन विभाग के नियम के मुताबिक कंपनी से गाड़ी लेने के छह माह के बाद वाहन प्रदूषण फैलाने लगता है। ऐसे में उसकी जांच कराना चाहिए। ऐसा न करने पर जुर्माने की व्यवस्था है। लेकिन यहां इसको लेकर अफसर व लोग दोनों अंजान बने हुए हैं। व्यावसायिक वाहनों को छोड़कर ज्यादातर वाहन बिना जांच के सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। लेकिन बेखौफ होकर सड़कों पर चल रहे हैं।

पुराने वाहनों की भरमार- जिले में दिल्ली व मुंबई जैसे शहरों से निकाले जाने वाले वाहनों की भरमार है। जो गाड़ियां वहां प्रदूषण फैलाने के आरोप में निकाली जाती हैं। उनका यहां तत्काल रजिस्ट्रेशन कर लिया जाता है। विभागीय आंकडे़ पर ही गौर करें तो यहां 24 हजार मोटर साइकिल, एक हजार चार पहिया, 11 सौ ट्रेक्टर व सात सौ के करीब अन्य वाहन 15 वर्ष से पुराने हैं। राजस्व वसूली के लिए सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है।

वाहनों पर हुई कार्रवाई

- जिले में एक वर्ष में कुल तीन सौ वाहनों पर प्रदूषण फैलाने के आरोप में कार्रवाई की गई है।

ढाई लाख वाहनों के सापेक्ष इतने कम वाहनों पर कार्रवाई होना। विभागीय लापरवाही को दर्शा रहा है। वह भी ऐसे हालात में जब प्रदूषण ने लखनऊ तक पांव पसार लिया है।

फैक्ट फाइल

वाहन - अनुमानित संख्या

मोटर साइकिल - 2,15,000 ट्रैक्टर - 26000

डिलीवरी वैन - 14,000

कार - 12,500

जीप टैक्सी - 11,00

ट्रक व डीसीएम - 700

जिम्मेदार के बोल

- संभागीय परिवहन अधिकारी दिनेश कुमार पांडेय का कहना है कि चे¨कग के दौरान प्रदूषण की भी जांच की जाती है। जो मिलते हैं उन पर जुर्माना किया जाता है। प्रदूषण जांच कराये बगैर सड़कों पर फर्राटा भरने वाले वाहनों पर कार्रवाई करने के लिए क्रास चे¨कग कराया जाएगा।

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