श्रम करने वाला ही करता है संस्कृति का निर्माण

Publish Date:Mon, 17 Jul 2017 01:00 AM (IST) | Updated Date:Mon, 17 Jul 2017 01:00 AM (IST)
श्रम करने वाला ही करता है संस्कृति का निर्माणश्रम करने वाला ही करता है संस्कृति का निर्माण
इलाहाबाद : समाज का रूपांतरण लोक संस्कृतियों के सहारे संभव है। समाज में व्याप्त नफरत, छुआछूत, ¨हसा और

इलाहाबाद : समाज का रूपांतरण लोक संस्कृतियों के सहारे संभव है। समाज में व्याप्त नफरत, छुआछूत, ¨हसा और पाखंडों से लड़ने में लोक संस्कृतियों का बड़ा हाथ रहा है। यह बातें बमरौली स्थित डॉ. अंबेडकर बुद्ध विहार में आयोजित समीक्षा बैठक में रविवार को प्रबुद्ध फाउंडेशन के प्रबंधक रामबृज गौतम ने कहीं। उन्होंने कहा कि श्रम करने वाला ही संस्कृति का निर्माण करता है। लोक संस्कृति को सहेजने का आंदोलन आज अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ग्रहण करता नजर आ रहा है। इसमें दलित-आदिवासी संस्कृति को सहेजने और उसके सरंक्षण एवं संवर्धन की अति आवश्यकता है। बैठक में 11 जून को एनसीजेडसीसी में आयोजित ग्रीष्मकालीन दलित बाल रंग कार्यशाला की समीक्षा हुई। सरंक्षक मुन्नीलाल बौद्ध, मोतीलाल अहिरवार, रिटायर्ड एसपी बीआर दोहरे कुमार सिद्धार्थ ने भी संबोधित किया। हीरालाल बौद्ध, अमर सिंह, नीरज गौतम, हिमांशु जैसवार, आदित्य कुमार, डार्विन सिंह, अरविंद, अंकित, लकी आदि रहे।

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