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छह हत्याओं से दहल गया था तुरकिया

Publish Date:Mon, 20 Mar 2017 11:12 PM (IST) | Updated Date:Mon, 20 Mar 2017 11:12 PM (IST)
छह हत्याओं से दहल गया था तुरकियाछह हत्याओं से दहल गया था तुरकिया
जागरण संवाददाता, आगरा: अछनेरा का तुरकिया गांव नौ मई 2012 को छह हत्याओं से दहल गया था। हत्यारे ने अपन

जागरण संवाददाता, आगरा: अछनेरा का तुरकिया गांव नौ मई 2012 को छह हत्याओं से दहल गया था। हत्यारे ने अपने भाई-भाभी और उनके चार बच्चों को निर्ममता पूर्वक कुल्हाड़ी से काट डाला था। छह कत्ल करने के बाद उसने अपनी शर्ट का खून भी नहीं धोया और दोस्त तथा बहन के साथ निकल गया।

ये थी कहानी

तुरकिया गांव में रिटायर्ड फौजी शिव सिंह जाट के दूसरी पत्‍‌नी आशा से तीन बेटे सत्यभान, गंभीर और कान्हा थे। दो बेटियों गायत्री और छोटी की शादी खंदौली में हुई थी, जबकि पहली पत्‍‌नी का बेटा धर्मवीर गांव छोड़कर राजस्थान में रहने लगा था। तीन बेटों तथा आशा के हिस्से में एक-एक बीघा जमीन थी। वर्ष 2005 में एक रात शिव सिंह की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। बताया गया था कि बेटों ने ही उन्हें जहर दे दिया था। इसके बाद आशा बेटों से नाराज रहती थी। आरोप है कि आशा के किसी दूसरे मर्द से संबंध हो गए और अपने हिस्से की जमीन वह उसे देना चाहती थी, जो सत्यभान और गंभीर को गवारा नहीं हुआ। वर्ष 2007 में बैनामा करने जा रहे आशा की दोनों बेटों ने मिलकर तहसील के सामने हत्या कर दी। इसमें मुख्य आरोपी गंभीर बना, जबकि सत्यभान सह आरोपी था और उसे जल्दी जमानत भी मिल गई। इस घटना के बाद छोटा भाई कन्हैया गांव छोड़कर चला गया था।

जेल में बंद गंभीर को छुड़ाने की एवज में सत्यभान ने अपनी एक बीघा जमीन अपनी पत्‍‌नी पुष्पा के नाम करवा ली। जब गंभीर ने जमानत में खर्च के बाद बचे पैसे मांगे, तो सत्यभान ने उसे धमकाकर घर से भगा दिया। उसके बाद गंभीर दिल्ली में जाकर फैक्ट्री में मजदूरी करने लगा। मां की हत्या के बाद जमीन और पैसा गंवाने की आग में जल रहे गंभीर ने सत्यभान का परिवार खत्म कर डाला।

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इनकी हुई थी हत्या

सामान्य कद काठी के गंभीर सिंह ने पहले बडे़ भाई सत्यभान पर कुल्हाड़ी से दनादन वार किए। फिर आरती और गुड़िया को निशाना बनाया। भाभी पुष्पा कमरे से पति और दो बच्चों की हत्या की आहट से जाग पाती, उससे पहले हैवान कमरे में घुस गया। पुष्पा के साथ उसने भाई के खानदान के इकलौते बेटे कन्हैया और फिर दो साल की बच्ची को काट डाला।

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छह माह का अबोध था गवाह

जघन्य हत्याकांड का एकमात्र गवाह छह माह का अबोध गायत्री का बेटा था, जिसकी आंखों के सामने उसके मामा-मामी और चार भाई-बहनों का बेरहमी से कत्ल किया गया। गायत्री भाई के लिए तंबाकू लेने गई थी, इसलिए बेटे को घर पर ही छोड़ गई थी।

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    Web Title:(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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