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कुछ ऐसा रहा है दिल्‍ली के मशहूर लोदी गार्डन का ऐतिहासिक सफर

Publish Date:Sat, 18 Mar 2017 01:56 PM (IST) | Updated Date:Wed, 22 Mar 2017 12:36 PM (IST)
कुछ ऐसा रहा है दिल्‍ली के मशहूर लोदी गार्डन का ऐतिहासिक सफरकुछ ऐसा रहा है दिल्‍ली के मशहूर लोदी गार्डन का ऐतिहासिक सफर
आजादी के बाद अधिकतर स्थानों के नाम बदल दिए गए हैं। वह बात जुदा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब में अब भी लेडी विलिंगडन के नाम पर स्विमिंग क्लब सुरक्षित है।

लोदी गार्डन को ब्रिटिश काल में विकसित करते हुए 9 अप्रैल 1936 को लेडी विलिंगडन ने इसका विधिवत उद्घाटन किया। यही कारण था कि इस पार्क का नाम लेडी विलिंगन पार्क रखा गया। दरअसल यह लेडी विलिंगडन, भारत के तत्कालीन वाइसरॉय और गवर्नर जनरल विलिंगडन के मार्कोस की पत्नी की दूरदृष्टि थी, जिसके कारण आज का लोदी गार्डन अस्तित्व में आया। सुबह घूमने की शौकीन अंग्रेज वाइसरॉय की पत्नी को इसके लिए सैय्यद और लोदी राजवंशों के मकबरों से सटा इलाका सबसे बेहतर लगा। यह बात उनकी पारखी नजर में साफ आ गई कि मूल रूप से इनमें से हर मकबरे के साथ एक बाग जुड़ा हुआ था।

अंग्रेज इतिहासकार पर्सिवल स्पीयर ने अपनी पुस्तक 'दिल्ली के अपने स्मारक और इतिहास' में इस बगीचे के उद्घाटन के विषय पर मजेदार टिप्पणी करते हुए लिखा है कि पूरी दिल्ली एक महामारी के रूप में 'विलिंगडनमय' हो गई। एक बगीचे के अलावा, तीन सड़कों, एक हवाई पट्टी क्षेत्र और एक अस्पताल का नाम पति, पत्नी या उनके रिश्तेदारों के नाम पर रखा गया था। वह बात अलग है कि आजादी के बाद के दौर में इनमें से अधिकतर स्थानों के नाम बदल दिए गए हैं। वह बात जुदा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब में अब भी लेडी विलिंगडन के नाम पर स्विमिंग क्लब सुरक्षित है।

यह बाग खैरपुर नामक गांव की जमीन का अधिग्रहण करके बनाया गया था। यह अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण विधेयक 1894 के तहत किया गया। यहां के विस्थापितों को कोटला मुबारकपुर क्षेत्र सहित दिल्ली के अन्य स्थानों पर बसाया गया।

आजादी के बाद, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को देखते हुए इस पार्क का नाम लोदी गार्डन रखा गया। विख्यात वास्तुकार जेए स्टीन ने वर्ष 1968 में इस बाग का विकास करते हुए सुंदरीकरण किया। जिसके तहत इस बाग के बीच में एक फव्वारे के साथ सर्पिल आकार की 300 मीटर लंबी और 3.3 मीटर गहरी झील विकसित की गई।

दिसंबर 1970 में, घरों के भीतर रखे जाने वाले पौधों को रखने के लिए फोर्ड फाउंडेशन की मदद से एक ग्लास हाउस बनाया गया। वर्ष 1996 में यहां पर भारतीय बोन्साई एसोसिएशन के सहयोग से एक राष्ट्रीय बोन्साई पार्क विकसित किया गया। जिसमें विभिन्न प्रजातियों के 10 से 50 साल पुराने बोन्साई पौधे रखे गए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में इसकी 75 वीं वर्षगांठ बनाई गई।

लोदी गार्डन में पक्षियों की 50 से अधिक प्रजातियों का बसेरा है। इनमें से अधिक लोकप्रिय पक्षियों की तस्वीरों को पार्क के चारों ओर प्रदर्शित किया गया है। ऐसा कहा जाता है कि केन्या के नैरोबी शहर के बाद दिल्ली में दुनिया के किसी भी दूसरे शहर की तुलना में सबसे अधिक पक्षियों की प्रजातियां हैं।

-तभी तो कहते हैं ऑक्सीजन टैंक :
दिल्ली के लोदी गार्डन को एक बड़ा ऑक्सीजन टैंक कह सकते हैं, क्योंकि यहां हर तरह के पेड़ हैं। ढेरों लोग यहां सुबह-शाम सैर के लिए आते हैं। उल्लेखनीय है कि देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री सरदार पटेल सुबह चार बजे लोदी गार्डन में सैर के लिए जाते थे। प्रदीप कृष्ण अपनी पुस्तक 'ट्रीज ऑफ दिल्ली, एक फील्ड गाइडÓ में लिखते हैं कि पेड़ को देखने के लिहाज से लोदी गार्डन सबसे उपयुक्त स्थान है, जहां पर पेड़ों की 110 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं और तो और यहां हर पेड़ को खोजने के लिए मानचित्र की सुविधा भी है।

-कोस मीनार है खास :
नई दिल्ली स्थित लोदी गार्डन में भी एक कोस मीनार है, जिसमें ऊपर की तरफ निगरानी रखने के लिए एक खिड़की भी बनी हुई है। यह मीनार लोदी गार्डन के भीतर कोने में बने शौचालय के पास है। यह कोस मीनार एक पतले सिलेंडर के आकार की ऊपरी तरफ एक सजावटी निगरानी खिड़की वाली है। 

नलिन चौहान

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Web Title:Lodi Garden s Historical Journey(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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