जुबान

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मोजेज सिंह ने दिलशेर के बहाने हर उस युवक की कहानी कही है, जो अपनी जिंदगी में खुद का स्वर और हस्ताक्षर पाना चाहते हैं। कई बार हम सभी भौतिक सुखों की लालसा में अपने मौलिक चाहत को दरकिनार कर देते हैं। फिर लालसा का भंवरजाल हमें क्रूर और मतलबी बना देता है। दिलशेर अपनी पहचान और एहसास के बाद अगला गुरचरण सिकंद बनने से बच जाता है।

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