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तो इसलिए भगवान विष्‍णु को पुकारते हैं 'हरि' और जपते हैं 'नारायण'

Publish Date:Fri, 16 Jun 2017 12:26 PM (IST) | Updated Date:Wed, 21 Jun 2017 02:03 PM (IST)
तो इसलिए भगवान विष्‍णु को पुकारते हैं 'हरि' और जपते हैं 'नारायण'तो इसलिए भगवान विष्‍णु को पुकारते हैं 'हरि' और जपते हैं 'नारायण'
हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। विष्णु का निवास क्षीर सागर है।

सृष्टि के पालनहार हैं श्री हरि विष्‍णु

पालनहार भगवान विष्णु के सबसे बड़े भक्त नारद मुनि उन्हें नारायण कहकर ही बुलाते हैं। तीनों लोकों में नारद मुनि भगवान को नारायाण-नारायण कह कर पुकारते हैं। भगवान विष्णु का निवास क्षीर सागर में है। वो शेषनाग के ऊपर शयन करते हैं। उनके चार हाथ है। जिसमें वह अपने नीचे वाले बाएं हाथ में कमल, अपने नीचे वाले दाहिने हाथ में कौमोदकी,ऊपर वाले बाएं हाथ में शंख, और अपने ऊपर वाले दाहिने हाथ में चक्रधारण करते हैं। भगवान विष्‍णु के भक्‍त उन्‍हें कई नामों से बुलाते हैं। कोई उन्‍हें कहता है अनन्तनरायण तो कोई लक्ष्मीनारायण। कोई शेषनारायण से उन्‍हें पुकारता है। 

नर से नारायण बनने की कथा

इन सभी नामों में नारायण जुड़ा रहता है। प्राचीन पौराणिक कथा के अनुसार जल भगवान विष्णु के पैरों से प्रकट हुआ था। भगवान विष्णु के पैर से बाहर आई गंगा नदी को विष्णुपदोदकी के नाम से जाना जाता है। जल को नीर या नर नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु भी पानी में रहते हैं इसलिए नर से उनका नाम नारायण बना। पानी के अंदर रहने वाले भगवान। भगवान विष्णु को हरि नाम से भी जाना जाता है। हिन्दू पुराणों की माने तो हरि का मतलब हरने वाला या चुराने वाला होता है। हरि हरति पापणि इसका मतलब है हरि वो भगवान हैं जो जीवन से पाप और समस्याओं को समाप्त करते हैं।

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Web Title:why lord vishnu devotees called narayana(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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