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इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता

Publish Date:Fri, 17 Mar 2017 02:26 PM (IST) | Updated Date:Sat, 18 Mar 2017 09:49 AM (IST)
इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ताइस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता
कहते है यदि शनि आपका मित्र बन जाये तो दुःखों का जीवन में कोई स्थान नहीं रह जाता, क्योकि शनिदेव उसे सुख और शांति का वरदान दे देते है। शनिदेव की पूजा में बरतें ये सावधानी...

 न्याय के देवता शनिदेव को खुश करना आसान नहीं है। लेकिन अगर शनिदेव खुश हो गए तो समझिए आपको समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। जानिए जीवन में शनिदेव की क्या भूमिका है। न्याय के देव, शनिदेव के बारे में तो हम सभी जानते है, शनिदेव पक्ष रहित होकर मनुष्य के कर्मों का फल देते है। शनिदेव अच्छे कर्म करने वाले मनुष्य को सभी सुख सुविधाएं और वैभव प्रदान करते है। वही दूसरी ओर गलत और पाप कर्म करने वाले मनुष्य को उचित दंड भी देते है। माना जाता है की जो लोग भक्तिपूर्वक और श्रद्धा से शनिदेव की पूजा करते है वह पाप की ओर जाने से बचते है। ये भी माना जाता है की इस तरह के लोगो को शनि की दशा के दौरान अधिक कष्ट झेलना नहीं पड़ता।

कहा जाता है शनिदेव दंड देने के साथ-साथ मनुष्यो को वरदान भी देते है। जहाँ एक ओर शनि की साढ़े साती और ढैय्या में इंसान पर दुःखों के पहाड़ टूटता है। वही दूसरी ओर जो लोग पुरे समर्पण और भक्तिभाव के साथ शनि देव की आराधना करते है उन्हें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी देते है। पुराणों में शनि देव को खुश करने के लिए और उनकी साढ़े साती और ढैय्या के अशुभ प्रभावो से बचने के लिए व्रत आदि का विशेष महत्त्व बताया गया है।
शनिवार को शनिदेव का दिन कहा जाता है इसीलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार का व्रत रखा जाता है और उनका पूजन किया जाता है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए जरुरी नहीं है की आप व्रत ही करे आपका सामर्थ्य हो तो केवल पूजन भी कर सकते है। शनिवार को शनिदेव का दिन कहा जाता है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए शनिवार को व्रत पूजन किया जाता है. यूँ तो आप वर्ष के किसी भी शनिवार के दिन आप इस व्रत की शुरुआत कर सकते है। 
– इस व्रत को करने के लिए मनुष्य का पवित्र होना अनिवार्य है। इसके लिए सबसे पहले प्रातः ब्रह्म मुहूर्त ने स्नान करना चाहिए।
– व्रत के दिन शनिदेव की प्रतिमा की विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।
– इस दिन शनि देव को लाजवंती का फूल, तिल, तेल, गुड़ आदि अर्पण करना चाहिए।
– शनिवार के दिन शनि देव के नाम का तेल का दीपक जलाना चाहिए।
– इसके बाद अपने द्वारा किये गए पापकर्म और जाने अनजाने में किये गए अपराधों के लिए क्षमा मांगे।
– शनि देव की पूजा करने के बाद राहु-केतु की भी पूजा करनी चाहिए।
– शनिवार के दिन मंदिर में जाकर पीपल के पेड़ का दिया जलाना चाहिए और उसमे जल भी देना चाहिए।
– पीपल के जल देने के बाद उसकी सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा भी करनी चाहिए।
– देवो के देव शनिदेव का पूजन करने के लिए संध्या काल में दीप जलाकर पूजा करनी चाहिए।
– शनिदेव को भोग लगाने के लिए उडद की दाल की खिचड़ी बनाकर मंदिर में ले जाये और भगवान को भोग लगाएं।
  
– इसके बाद उस खिचड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर ले।
– यदि आपका सामर्थ्य है तो इस दिन काली चीटियों को गुड़ व् आटा डाले।
– कहा जाता है शनि देव को काला रंग अत्यधिक प्रिय है इसीलिए इस दिन काले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
– जो शनि के प्रकोप को झेल रहे है वे शनिवार के दिन 108 तुलसी के पत्तो पर श्री राम चंद्र जी का नाम लिखकर पत्तो को एक सूत्र में पिरोकर माला बनाये। और इस माला को श्री हरी विष्णु के गले में डाले।
– कहा जाता है भक्ति और श्रद्धापूर्वक शनिवार के दिन शनिदेव का व्रत और पूजन करने वाले भक्त पर चल रही शनि की दशा और उनका कोप का प्रभाव कम हो जाता है।
– शनिदेव की पूजा के लिए दान करना भी जरुरी माना जाता है। शनि के प्रकोप को कम करने के लिए शास्त्रो में बताई गयी शनि की वस्तुओ का दान करे। शास्त्रो के मुताबिक, उड़द, तेल, तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कम्बल या कपडा, लोहा या इससे बानी वस्तुये और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दान करनी चाहिए।
– शनि व्रत करने के लिए शुद्ध और पवित्र विचार रखना भी अनिवार्य है। आहार में दूध, लस्सी, फलो और उनके रास का सेवन कर सकते है।
– कहते है यदि शनि आपका मित्र बन जाये तो दुःखों का जीवन में कोई स्थान नहीं रह जाता, क्योकि शनिदेव उसे सुख और शांति का वरदान दे देते है।

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