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जिस घर में हनुमान जी की कृपा बरसती है वहां कोई भी दुख, क्‍लेश घर में नहीं आता

Publish Date:Mon, 17 Apr 2017 11:42 AM (IST) | Updated Date:Mon, 17 Apr 2017 05:25 PM (IST)
जिस घर में हनुमान जी की कृपा बरसती है वहां कोई भी दुख, क्‍लेश घर में नहीं आताजिस घर में हनुमान जी की कृपा बरसती है वहां कोई भी दुख, क्‍लेश घर में नहीं आता
यदि शाम के समय दक्षिणमुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर हनुमानजी के चमत्कारिक मंत्रों का जाप किया जाए तो यह बहुत फलदायी होता है।

 हनुमानजी संकटमोचन कहलाते हैं। ‘हनुमान’ शब्द का ह ब्रह्मा का, नु अर्चना का, मा लक्ष्मी का और न पराक्रम का द्योतक है। हनुमान को शिवावतार अथवा रुद्रावतार भी माना जाता है। महावीर हनुमान को सबसे शक्तिशाली देवता के रूप में पूजा जाता है |ये अमर और चिरंजीवी है | इन्होने असंभव कार्यो को चुटकी भर पल में समूर्ण कर दिया है , अतः इन्हे संकट मोचक के नाम से भी पुकारा जाता है | इनकी भक्ति करने से हनुमान कृपा के द्वारा मनुष्य को शक्ति और समर्पण प्राप्त होता है | इनकी भक्ति से अच्छा भाग्य और विदुता भी प्राप्त होती है | शास्‍त्रों के अनुसार हनुमान जी को भगवान शिव का गयारहवां अवतार माना जाता है। हनुमान जी की आराधना करने से हर पाप और हर कष्‍ट से मुक्‍त मिलती है। हनुमान जी भूत-प्रेत से भी अपने भक्‍तों को बचाते हैं। जिस घर में हनुमान जी की कृपा बरसती है वहां कोई भी दुख, क्‍लेश घर में नहीं आता।

इन्हें सात चिरंजीवियो में से एक माना जाता है। वे सभी कलाओं में सिद्धहस्त एवं माहिर थे। रामभक्त हनुमान बल, बुद्धि और विद्या के सागर तो थे ही, अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता और ज्योतिष के भी प्रकांड विद्वान थे। वे हर युग में अपने भक्तों को अपने स्वरूप का दर्शन कराते हैं और उनके दुःखों कोे हरतेे हैं। वे मंगलकर्ता एवं विघ्नहर्ता हैं।  ऋग्वेद में उनके लिए ‘विश्ववेदसम्’ शब्द का प्रयोग किया गया है। इसका अभिप्रेत अर्थ है- विद्वानों में सर्वश्रेष्ठ। हनुमान अपने युग के विद्वानों में अग्रगण्य थे। उनकी गणना सामान्य विद्वानों में नहीं, बल्कि विशिष्ट विद्वानों में की जाती थी। वाल्मीकि रामायण में हनुमान को महाबलशाली घोषित करते हुए ‘बुद्धिमतां वरिष्ठं’ कहना पूर्ण युक्ति संगत है। ‘रामचरितमानस’ में भी उनके लिए ‘अतुलित बलधामं’ तथा ‘ज्ञानिनामग्रगण्यम’ इन दोनों विशेषणों का प्रयोग द्रष्टव्य है। 

जानिए श्री हनुमान जी के कष्‍ट निवारण मंत्र

यदि शाम के समय दक्षिणमुखी हनुमान मूर्ति के सामने शुद्ध होकर हनुमानजी के चमत्कारिक मंत्रों का जाप किया जाए तो यह बहुत फलदायी होता है। हनुमान जी को पान का बीड़ा जरूर चढ़ाना चाहिए। मनोकामना पूर्ति के लिए इमरती का भोग लगाना भी शुभ होता है।

श्री हनुमान मूल मंत्र: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥

हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्।

हनुमन्नंजनी सुनो वायुपुत्र महाबल:। अकस्मादागतोत्पांत नाशयाशु नमोस्तुते।।

ऊँ हं हनुमंताय नम:।

ऊँ नमो हनुमते रूद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।।

महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते। हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।

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Web Title:Lord Hanuman is pleased there is no misery and distress in house(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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