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सिद्धपीठ माता काली मंदिर

Publish Date:Fri, 19 Oct 2012 12:45 PM (IST) | Updated Date:Fri, 19 Oct 2012 12:45 PM (IST)
सिद्धपीठ माता काली मंदिर
छावनी स्थित एक अन्य सिद्धपीठ माता काली के मंदिर में दूसरे मंदिरों की तरह नवरात्र पर पूजा शुरू नहीं की जाती, बल्कि यहां चौथे नवरात्र से पूजा शुरू होती है, जो लंका दहन तक जारी रहती ह

फिरोजपुर। छावनी स्थित एक अन्य सिद्धपीठ माता काली के मंदिर में दूसरे मंदिरों की तरह नवरात्र पर पूजा शुरू नहीं की जाती, बल्कि यहां चौथे नवरात्र से पूजा शुरू होती है, जो लंका दहन तक जारी रहती है। मंदिर में पूजी की सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह विशेष पूजा दोपहर बाद शुरू होती है।

कहना है मंदिर के पुजारी दीपक शुक्ला का -

मंदिर के पुजारी दीपक शुक्ला का कहना है कि नवरात्र पर शुरू होने वाली पूजा दिन भर जारी रहती है। इसके उपरांत शाम के बाद विशेष पूजा आरंभ होती है, जिसमें बंगाली मूल के लोग अधिक संख्या में हिस्सा लेते हैं। बंगाल से आए कारीगरों द्वारा माता दुर्गा की विशेष मूर्ति बनाई जाती है, जिसे तैयार करने में एक सप्ताह का समय लगता है। दशहरे से एक दिन पहले माता दुर्गा की मूर्ति को शोभायात्रा के रूप में छावनी के बाजारों से निकाला जाता है, जिसमें छावनीवासियों से अधिक संख्या बंगाली सैनिकों व बंगाली परिवारों की होती है। मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा हुसैनीवाला स्थित सतलुज दरिया पर मूर्ति को जल प्रवाह करने के बाद समाप्त हो जाती है।

माता को लगाया जाता

है विशेष भोग-

पूरे नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने के बाद उन्हें दाल व चावल से बनी खिचड़ी से लगाया जाता है ।

कितना चढ़ता है चढ़ावा-

आम दिनों की तरह विशेष पूजा के समय मंदिर में होने वाले धार्मिक समारोह में हजारों रुपये का चढ़ावा चढ़ाया जाता है, जिसे बाद में मंदिर कमेटी द्वारा मंदिर के ही विकास कायरें पर खर्च कर दिया जाता है।

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आपकी प्रतिक्रिया
  • Kamal Yadav

    happy birthday to u sunny sir

  • sushil

    ARJUN, DAKAIT, JEET, KSHATRIYA, ARJUN PANDIT, ZIDDI, GHATAK, SALAKHEEN, GHAYAL, GADAR, ETC. no one can be achieved to sunny. he is my superhero and a grand changemaker in bolly'wood. Its great that at this stage he give respects to his father and seniors. i luv u .. kashinath.

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