My work is my identity: Deepika Jindal

मेरा काम ही मेरी पहचान :दीपिका जिंदल

लुभावने होम डेकोर प्रोडक्ट्स की इस दुनिया में अलग पहचान बनाई है दीपिका जिंदल ने। दीपिका जिंदल से सखी की संपादक प्रगति गुप्ता की एक मुलाकात।

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personal problems

व्यक्तिगत समस्याएं

अगर आपको लगता है कि अपने कपल टाइम को एंजॉय नहीं कर पा रहे हैं तो देर रात तक लैपटॉप, मोबाइल या अन्य गैजेट्स का इस्तेमाल बंद कर दें।

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The Don 2

द डॉन 2

सामग्री- 9 इंच का 1 पित्ज़ा बेस, 65 मिलीलीटर बेस सॉस, 15 ग्राम रिकोटा चीज़, 20 ग्राम हरी शिमला मिर्च, 7 ग्राम पैपरिका पाउडर, 70 ग्राम मॉज़रेला चीज़, 70 ग्राम पोर्क पेपरोनी स्लाइस।

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Swim in Style

स्विम इन स्टाइल

बीच हॉलिडे पर जाने का मन बना रही हों या फिर यूं ही स्विमिंग का लुत्फ उठाना चाहती हों.., सखी से जानिए किस बॉडी टाइप पर किस तरह के स्विमवेयर्स जंचेंगे।

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Nil battey sannata is Story of expectations

उम्मीदों की कहानी निल बटे सन्नाटा

फिल्म की कहानी में धार हो तो फिल्म का बजट मायने नहीं रखता।'निल बटे सन्नाटा की कामयाबी ने इसे साबित कर दिया।कैसे रची गई कामयाबी की यह कहानी बता रहे हैं फिल्म संपादक अजय ब्रह्मात्मज।

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Accountability Of time

वक्त की जवाबदेही

कहते हैं, जीवन में हमेशा अपना चाहा नहीं होता। शादी जैसे रिश्ते में भी कई बार ऐसा होता है पारिवारिक-सामाजिक मर्यादा के लिए लोग इस बंधन में । बंधे रहते हैं। ऐसे ही कुछ सवालों को उठात

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definition of relationships is changing

रिश्तों की बदलती परिभाषा

समय के साथ लोगों की सोच बदल रही है।अब वे अपने रिश्तों के प्रति व्यावहारिक नज़रिया रखते हैं और छोटी-छोटी बातों पर तार्किक ढंग से सोचते हैं।सखी के साथ एक नज़र सामाजिक बदलाव पर ।

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Decorate the house by Rugs

रग्स से सजाएं घर

घर के किसी कोने को खास बनाने के लिए रग्स या कालीन की बड़ी अहमियत होती है। आजकल मार्केट में मौजूद कलरफुल, फ्लोरल पैटर्न वाले रग्स घर की खूबसूरती में चार-चांद लगा रहे हैं।

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यह भी देखें

every  injured received treatment in time

घायल को मिले वक्त पर उपचार

दुर्घटनाओं में रोज करीब 382 मौतें होती हैं। इसकी एक वजह है-समय पर उपचार न मिलना। क्या कहता है इस पर कानून, बता रही हैं सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट कमलेश जैन।

Dreams in the Mirror of true

सच के आईने में सपने

क्या आज का युवा सपनों की दुनिया में जीता है,जि़ंदगी की ज़मीनी हकीकत से दूर होता जा रहा है,क्या नई चुनौतियां उसे पसोपेश में डाल रही हैं?ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब ढूंढ रही हैं विनीता