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मंत्रियों से नाखुश वसुंधरा का अब संसदीय सचिवों पर भरोसा

मंत्रियों के कामकाज के तरीके से नाखुश राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अब पांच संसदीय सचिवों एवं बोर्ड, निगम के चेयरमैन को आम लोगों के साथ संवाद करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

By Bhupendra SinghEdited By: Published: Tue, 26 Apr 2016 04:13 AM (IST)Updated: Tue, 26 Apr 2016 04:15 AM (IST)
मंत्रियों से नाखुश वसुंधरा का अब संसदीय सचिवों पर भरोसा

जयपुर [नरेन्द्र शर्मा]। मंत्रियों के कामकाज के तरीके से नाखुश राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अब पांच संसदीय सचिवों एवं बोर्ड, निगम के चेयरमैन को आम लोगों के साथ संवाद करने की जिम्मेदारी सौंपी है। सीएम ने सोमवार को संसदीय सचिवों की बैठक लेकर विधानसभा क्षेत्रों में जाकर अभाव अभियोग सुनने के निर्देश दिए।

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संसदीय सचिवों के साथ क्षेत्रीय विधायकों को भी मौजूद रहना होगा। संसदीय सचिवों की जनसुनवाई में सम्बन्धित क्षेत्र के सरकारी अधिकारियों को उपस्थित रहना होगा,जिससे समस्याओं को समाधान तत्काल हो सके। संसदीय सचिव अपनी रिपोर्र्ट नियमित रूप से सीएमओ को भेजेंगे और फिर सीएमओ के अधिकारी रिपोर्ट की सत्यता जांचेंगे।

करीब ढ़ाई वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुकी राज्य सरकार के मंत्रियों के कामकाज के तरीकों को लेकर लम्बे समय से शिकायतें सीएम तक पहुंच रही थी।

अधिकांश शिकायतें ये थी कि मंत्री सचिवालय स्थित अपने कक्षों में बैठते ही नहीं है और ना ही जिला के दौरे के दौरान जन सुनवाई करते है। हालांकि सत्ता संभालते ही सीएम ने मंत्रियों को प्रतिदिन दो घंटे प्रदेश भाजपा मुख्यालय में जन सुनवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन पिछले कुछ माह से यह भी औपचारिकता ही रह गई, कई वरिष्ठ मंत्री तो आते ही नहीं है। इसी से नाराज सीएम ने विधानसभा के बजट सत्र से पूर्व पांच संसदीय सचिव बनाए और अब इन्हें जनता के बीच जाने के लिए कहा गया है। इसी प्रकार बोर्ड एवं निगम के एक दर्जन अध्यक्षों को भी अपने गृह जिलों को दौरा कर आम लोगों से मिलने के लिए कहा गया है। अध्यक्षों को भी अपनी रिपोर्ट सीएमओ को नियमित रूप से भेजनी होगी।

सीएम के निर्देश पर भाजपा के जिला प्रमुख एवं पंचायत समिति के प्रधान अब सप्ताह में एक बार अपने-अपने क्षेत्रों का दौरा करेंगे।


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