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आज दुनिया के लिए सरदर्द बना हुआ है यह देश, आज ही के दिन बना था

Publish Date:Sat, 09 Sep 2017 05:33 PM (IST) | Updated Date:Sat, 09 Sep 2017 05:33 PM (IST)
आज दुनिया के लिए सरदर्द बना हुआ है यह देश, आज ही के दिन बना थाआज दुनिया के लिए सरदर्द बना हुआ है यह देश, आज ही के दिन बना था
1948 में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया नाम से दो देश बन गए। उत्तर कोरिया ने डेमोक्रेटिक पीपुल रिपब्लिक बना, जबकि दक्षिण कोरिया कैपटलिस्ट रिपब्लिक के रूप में उभरा।

उत्तर कोरिया आज दुनिया के लिए सिरदर्द का कारण बना हुआ है। उत्तर कोरिया के बार-बार के परमाणु धमाकों ने दुनियाभर के नेताओं के माथे पर सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हाल ही में उत्तर कोरिया ने हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया है, जिसके बारे में उसका दावा है कि यह परीक्षण सफल रहा है। परमाणु परीक्षणों को लेकर उत्तर कोरिया अपने सबसे बडे हिमायती देश चीन की भी नहीं सुनता है। अमेरिका सहित कई देश उस पर प्रतिबंध और तेज करने की बात कर रहे हैं। मैक्सिको ने तो उत्तर कोरिया के राजदूत को देश से निकाल भी दिया है। लेकिन उत्तर कोरिया की समस्या नहीं है। यह उस समय से समस्या है, जब यह देश बना था।

कब बना उत्तर कोरिया
1910 में कोरिया पर जापान ने कब्जा कर लिया था। साल 1945 में दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति पर जब जापान ने आत्मसमर्पण किया तब कोरियाई प्रायद्वीप दो हिस्सों में बंट गया। इसके उत्तरी हिस्से में सोवियत संघ का कब्जा था, जबकि दक्षिण हिस्से पर अमेरिकियों ने कब्जा कर लिया। लंबे समय तक दोनों हिस्सों के एक साथ आकर एक देश बनने की बातें चलीं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। आखिरकार 9 सितंबर 1948 को किम 2 सुंग ने डेमोक्रेटिक पीपुल रिपब्लिक ऑफ कोरिया के रूप में अलग राष्ट्र की घोषणा कर दी।

देश बनने के साथ ही जंग
1948 में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया नाम से दो देश बन गए। उत्तर कोरिया ने डेमोक्रेटिक पीपुल रिपब्लिक बना, जबकि दक्षिण कोरिया कैपटलिस्ट रिपब्लिक के रूप में उभरा। लेकिन उत्तर कोरिया ने जल्द ही दक्षिण कोरिया को हड़पने की कोशिश की और इसी का नतीजा रहा कि 1950-53 तक कोरियाई प्रायद्वीप एक बार फिर युद्ध की आग में झुलसने लगा। आखिरकार दोनों देश युद्ध विराम पर सहमत हुए, लेकिन दोनों के बीच शांति की कोई संधि नहीं हुई।

उत्तर कोरिया के लिए इसलिए भी खास से 9 सितंबर
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम से दुनिया चिंतित है। दुनिया की तमाम चिंताओं और प्रतिबंधों की परवाह किए बिना उत्तर कोरिया सालों से अपना परमाणु कार्यक्रम चला रहा है। 9 सितंबर का दिन इस देश के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इसी दिन 2016 में उत्तर कोरिया ने अपना पांचवां परमाणु परीक्षण किया था।

अमेरिका से दुश्मनी की है ये वजह
दक्षिण कोरिया से युद्ध में उत्तर कोरिया को अप्रत्‍याशित जीत मिली। लेकिन जीत का जश्‍न मनाने से पहले ही उसको अमेरिका ने तगड़ा झटका दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्‍ताव पारित करवा लिया, जिसके बाद अमेरिका के झंडे तले सहयोगी देशों की सेना दक्षिण कोरिया की मदद के लिए वहां पहुंच गई। इन सेनाओं ने युद्ध की तस्‍वीर ही बदलकर रख दी थी। नतीजा यह हुआ है कि उत्तर कोरिया को पीछे हटना पड़ा और वह जीती हुई बाजी हार गया। 1953 में कोरिया युद्ध समाप्त हुआ। तभी से उत्तर कोरिया को अमेरिका एक कांटे की तरह चुभ रहा है।

इतने वर्षों से उसकी अमेरिका से बदला लेने की आग ठंडी नहीं पड़ी है। आलम यह है कि वहां उत्तर कोरिया में अमेरिका का नाम लेना भी अपराध माना जाता है। एक लेख में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के कोरियन इतिहास के प्रोफेसर चार्ल्स के. आर्मस्ट्रांग ने लिखा कि इस युद्ध के अंत में मरनेवाले, घायल और गुम हुए कोरियाई लोगों की संख्या करीब तीस लाख थी, जो कि इनकी कुल आबादी का करीब 10 फीसदी थी।

परमाणु कार्यक्रम की लागत करीब 1 से 3 बिलियन डालर
दक्षिण कोरिया के मुताबिक उत्‍तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम की लागत करीब 1 बिलियन से 3 बिलियन डॉलर के करीब है। वहीं दूसरी और अमेरिका की वर्जीनिया क्‍लास सबमरीन की कीमत करीब 2.5 बिलियन डालर है। इसके अलावा अमेरिकी युद्धपोत गेराल्‍ड फोर्ड की कीमत करीब अाठ बिलियन डॉलर है। दक्षिण कोरिया के राष्‍ट्रीय सुरक्षा मंत्रालय के मुताबिक उत्‍तर कोरिया में किम के सत्‍ता में आने के बाद वर्ष 2011 से पिछले वर्ष तक इस देश ने करीब 31 मिसाइल परीक्षण किए हैं। इन पर करीब 97 मिलियन डॉलर की लागत आई थी।

40 अरब डॉलर की है अर्थव्यवस्था
अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए के मुताबिक उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था करीब 40 अरब डॉलर की है। वहीं इसका कुल निर्यात करीब पौने चार अरब अमरीकी डॉलर का है। यह किसी छोटे से यूरोपीय देश सैन मारीनो या फिर मोजांबिक के बराबर ही है। वह ज्‍यादातर खनिज, धातुओं से बने सामान, युद्ध का साजो-सामान, कपड़े, कृषि उत्पाद और मछलियों का निर्यात करता है। उत्तर कोरिया की प्रति व्यक्ति क्रय शक्ति करीब 1800 यूएस डॉलर है। इस मामले में वह दुनिया के 230 देशों की सूची में 208 वें नंबर पर है।

 

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Web Title:jagran special Today is National Liberation Day of Korea(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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