जीवंत हो उठी भारतीय संस्कृति

Publish Date:Sun, 20 Oct 2013 12:23 AM (IST) | Updated Date:Sun, 20 Oct 2013 12:25 AM (IST)
जीवंत हो उठी भारतीय संस्कृति

- प्रस्तुतियों से प्रतिभागियों ने किया पाश्चात्य संस्कृति पर प्रहार

जागरण संवाददाता, देवरिया: नगर स्थित विश्वनाथ त्रिपाठी शिक्षण संस्थान का गुरुवार शाम आयोजित वार्षिकोत्सव समारोह भारतीय गीत, संगीत व नृत्य से सराबोर रहा। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति को जीवंत कर दिया।

साधना, श्वेता पांडेय, शिवानी, अंजली, दीपशिखा द्वारा प्रस्तुत गीत बाबुल का घर छोड़कर बेटी पिया के घर चली, ये कैसी घड़ी आई है मिलन है जुदाई है.., की भावपूर्ण प्रस्तुति पर सभी की आंखें नम हो गई। इसी क्रम छात्राओं ने सोहर युग-युग जीय तू ललनवा, भवनवा के भागि जागल हो.., नीबिया के डाढि़ मईया झूलेली झूलुअवा.., हमरे मड़वा में अईह भसुर धीरे-धीरे.. प्रस्तुत कर मृत प्राय हो चुकी भारतीय संस्कृति को जीवंत कर दिया। नारियां देश की जाग जाएं अगर युग स्वयं ही बदल जाएगा.. कौव्वाली सराही गई। शिखा व नेहा द्वारा ओ राधा तेरी चुनरी.., अनुष्का श्रीवास्तव द्वारा हे गणपति देवा.., तथा मोनिका नियोगी द्वारा खाइके पान बनारस वाला, खुल गए बंद अक्ल का ताला..गीत प्रस्तुत नृत्य को वाहवाही मिली।

गोपी राजभर, प्रणेश प्रिय शुक्ल, अमन त्रिपाठी, विद्या उपाध्याय, अर्चना, अमिषा मिश्र, अंकिता सिंह की प्रस्तुतियां भी सराही गई। हास्य एकांकी ढकनी महाराज ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।

इस दौरान प्रबंधक विरेन्द्र त्रिपाठी, प्रधानाचार्य अरविंद त्रिपाठी, डा. विश्वामित्र मिश्र, शंभूनाथ सिंह, गिरिजा शंकर दीक्षित, पंकज उपाध्याय, विजय कुमार गुप्त, प्रदीप जायसवाल, राधारमण पांडेय, श्रवण कुमार सिंह, राजीव उपाध्याय, अन्नपूर्णा तिवारी, वंदना पांडेय, नेहा सिंह आदि मौजूद रहे।

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