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अगर निवेश की है दरकार तो लागू करिए श्रम सुधार..

Publish Date:Sat, 15 Jul 2017 01:13 AM (IST) | Updated Date:Sat, 15 Jul 2017 01:25 AM (IST)
अगर निवेश की है दरकार तो लागू करिए श्रम सुधार..अगर निवेश की है दरकार तो लागू करिए श्रम सुधार..
सूत्रों के मुताबिक यूपी सरकार को श्रम कानूनों में सुधार की सलाह नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगढि़या ने दी है।

हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। अपेक्षानुरूप औद्योगिक निवेश जुटाने में अब तक नाकाम रही उत्तर प्रदेश सरकार को नीति आयोग ने बड़े उद्योगों को आकर्षित करने के लिए लंबित श्रम सुधारों को लागू करने की सलाह दी है। आयोग का कहना है कि यूपी सरकार को प्रदेश में पूंजी निवेश आकर्षित करने के लिए औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 में संशोधन सहित मौजूदा श्रम नियम और कानूनों को उदार बनाना पड़ेगा। साथ ही प्रदेश को तमिलनाडु जैसे राज्यों की तर्ज पर नए भूमि अधिग्रहण कानून में राज्य स्तर पर बदलाव करने का सुझाव भी दिया है।

सूत्रों के मुताबिक यूपी सरकार को श्रम कानूनों में सुधार की सलाह नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पानगढि़या ने दी है। सूत्रों के मुताबिक पानगढि़या ने राज्य सरकार से औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अध्याय पांच बी की धारा 25के में संशोधन करने को कहा है। उनका कहना है कि कपड़ा जैसे क्षेत्रों, जिनमें रोजगार के अवसर अधिक पैदा होते हैं, उनके लिए प्रदेश सरकार को इस कानून के प्रावधानों से छूट देनी चाहिए।

दरअसल औद्योगिक विवाद अधिनियम की इस धारा के तहत अगर किसी कंपनी में 300 से अधिक कामगार कार्यरत हैं तो वह कर्मचारियों की छंटनी नहीं कर सकती। इस प्रावधान के चलते बहुत सी बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश करने से बचती हैं। ऐसे में राज्य सरकार अगर इस धारा में संशोधन करती है तो इससे बड़ी औद्योगिक इकाइयों को निवेश करने में मदद मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने राज्य सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में भी तमिलनाडु की तर्ज पर बदलाव करने को कहा है ताकि नयी परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो सके।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश की नयी सरकार के समक्ष निवेश जुटाने की बड़ी चुनौती है। फिलहाल देश के मुकाबले चार प्रतिशत निवेश भी यूपी में नहीं आता है। यूपी में जो कुछ निवेश आता भी है वह गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जैसे एनसीआर जिलों में सिमट कर रह जाता है। इसके चलते मध्य यूपी, पूर्वाचल और बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में निवेश का अभाव रहता है।

औद्योगिक नीति एवं संव‌र्द्धन विभाग (डीआइपीपी) के अनुसार वर्ष 2016 में जनवरी से दिसंबर के दौरान देशभर में कुल 4,14,086 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए जिसमें से मात्र 3.34 प्रतिशत निवेश के प्रस्ताव उत्तर प्रदेश के लिए आए। इस अवधि में यूपी में मात्र 13,722 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए। चिंताजनक बात यह है कि बीते वर्षो में देश में आए कुल निवेश प्रस्तावों में यूपी का हिस्सा बढ़ा नहीं है।

इस बीच यूपी की योगी सरकार ने 11 जुलाई को पेश अपने पहले बजट में औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2017 के क्रियान्वयन के लिए 20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। साथ ही निवेश बोर्ड की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपये और सिंगल विंडो क्लीयरेंस के लिए 10 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

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Web Title:Uttar Pradesh need to investment then apply labor reforms(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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