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अखिलेश सरकार, बेदम धार

Publish Date:Fri, 15 Mar 2013 02:33 PM (IST) | Updated Date:Fri, 15 Mar 2013 02:44 PM (IST)
अखिलेश सरकार, बेदम धार
लोकतांत्रिक व्यवस्था के सजग प्रहरी माने जाने विपक्षी दलों के तेवर भी बीते एक साल में धारदार नहीं दिखे। ऐसा नहीं कि सरकार को बैकफुट पर लाने के मौके न मिलें हो। साम्प्रदायिक दंगे, लच

अवनीश त्यागी

लोकतांत्रिक व्यवस्था के सजग प्रहरी माने जाने विपक्षी दलों के तेवर भी बीते एक साल में धारदार नहीं दिखे। ऐसा नहीं कि सरकार को बैकफुट पर लाने के मौके न मिलें हो। साम्प्रदायिक दंगे, लचर कानून व्यवस्था, बिजली संकट, ठप विकास कार्य, की जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष केवल मीडिया में बयान देने तक सीमित रहा।

विरोधी दलों में आंतरिक कलह व सत्ता से सीधे टकराव न लेने की मानसिकता ने भी सरकार को काफी राहत दी। कन्नौज संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव को ही लें, मुख्यमंत्री की पत्नी व सपा प्रत्याशी डिंपल यादव के मुकाबिल कोई उम्मीदवार न आना, शुरुआती दौर में विपक्ष की साख पर सवाल बना। भ्रष्टाचार के आरोपों की जांचों में घिरने का मानसिक दबाव मुख्य विपक्षी दल बसपा पर बना रहा।

दूसरे बड़े विपक्ष दल भारतीय जनता पार्टी के पास समक्ष नेताओं की कमी नहीं परन्तु आंतरिक गुटबाजी की दलदल से उबर नहीं पा रही है। निकाय चुनाव में मिली सफलता को कैश करने में भी भाजपाई कामयाब न हो सके। इसी तरह विधानपरिषद में भी भाजपाई एक सूत्र में बंधे नहीं दिखे। कांग्रेस का जिक्र करें तो चुनावी पराजय की हताशा और संगठन में व्यापक बदलाव की मायूसी हावी रही। केंद्र सरकार चलाने को समाजवादी पार्टी से दिल्ली में दोस्ताना रिश्तों के बाद लखनऊ में दुश्मनी का भाव पैदा न हो सका।

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Web Title:UP government: weak opposition(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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