PreviousNext

सीएम योगी के अलग - अलग रंग, आहट से पहचानती हैं गौशाला की गायें

Publish Date:Mon, 20 Mar 2017 06:36 PM (IST) | Updated Date:Mon, 20 Mar 2017 08:01 PM (IST)
सीएम योगी के अलग - अलग रंग, आहट से पहचानती हैं गौशाला की गायेंसीएम योगी के अलग - अलग रंग, आहट से पहचानती हैं गौशाला की गायें
खुद योगी आदित्यनाथ स्वीकार करते हैं कि गोशाला की गायें उनकी आहट पहचान लेती है। वह कहते हैं कि 'मेरी गायें तो मुझसे बात करती हैं।

गोरखपुर (गिरीश पांडेय)। मुख्यमंत्री बन चुके योगी आदित्यनाथ धार्मिक एवं राजनीतिक कार्यों में व्यस्तता के बावजूद गोसेवा पर भी भरपूर ध्यान देते हैं। गोरखनाथ मंदिर परिसर में स्थित गोशाला में प्रतिदिन सेवा करना और गायों-बछड़ों को दाना खिलाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। लंबे समय से वे गोशाला में रह रही गायों से इतना घुल-मिल गए हैं कि वे उनकी आहट पहचान लेती हैं। वह वहां बछड़े-बछिया के साथ भी वक्त देते हैं, उन्हें सहलाते-दुलारते हैं।

खुद योगी आदित्यनाथ स्वीकार करते हैं कि गोशाला की गायें उनकी आहट पहचान लेती है। योगी तो इसे और भी दूसरे रूप में देखते हैं। वह कहते हैं कि 'मेरी गायें तो मुझसे बात करती हैं। पूर्व में योगी ने गोशाला और गोसेवा के प्रति अपने जुड़ाव के बारे में जागरण के साथ विस्तार से बातचीत करते हुए कई रोचक जानकारी साझा की थी। एक वाकया सुनाते हुए योगी ने बताया था कि गोरखनाथ मंदिर परिसर में रहने पर मैं रूटीन में गोशाला में जाता हूं। राजनीतिक व्यस्तता के नाते कभी-कभी कुछ दिनों के लिए यह क्रम टूटता भी है, लेकिन आमतौर कोशिश रहती है कि गोसेवा का क्रम न टूटने पाए। 

एक दिन बाहर से लौटने के बाद मैं गोशाला गया। मेरी आहट सुनकर अनेक गायोंं में से एक गाय तेजी के साथ गेट पर आई। वह उदास थी। आंखों के नीचे सूख चुके आंसुओं की लकीर थी। मैंने गोशाला के कर्मचारी से पूछा कि गाय को कोई तकलीफ है क्या। जवाब मिला इसका नवजात बच्चा गंभीर रूप से बीमार है। मैंने इलाज के लिए तुरंत डाक्टर बुलाया। गोशाला में गया तो भी वह मेरे इर्द-गिर्द घूमती रही। दूसरे दिन गोशाला गया तो भी वह गाय उसी तरह से गेट पर आई। लगा कि वह कह रही हो कि आपका प्रयास बेकार गया। मैंने कर्मचारी से पूछा कि इसके बच्चे का क्या हाल है। जवाब मिला वह नहीं रहा।

गोवंश के अलग अलग नाम रखा है योगी ने 
बकौल योगी, गोशाला में जाने पर उन्हें कई बार गायों से संवाद करने का अहसास हुआ। मठ से उतरने के बाद जैसे ही वे गोशाला की ओर मुखातिब होते हैं, उसके खुले बाड़े में रहने वाली गायें उनके कदमों की आहट पहचान जाती हैं। गेट से अंदर पहुंचने पर वे उनको घेर लेती हैं। योगी ने सबके खास कर बछड़े-बछिया के अलग-अलग नाम रखे हैं। उसी नाम से उनको बुलाते हैं। उनकी भरपूर प्रतिक्रिया भी मिलती है।

गुण व हरा चारा अपने हाथ से खिलाते हैं

योगी गोशाला में जब भी जाते हैं तो साथ में गुड़ ले जाते हैं। गोवंश को बारी-बारी से खिलाते हैं। हरा चारा अगर पड़ा है तो उसे भी अपने हाथ से खिलाते हैं। गुड़ के लिए महराजगंज के चौक स्थित फार्म पर हर साल गन्ना बोया जाता है। भूसा भी वहीं से आता है। गोशाला के पीछे की पूरी जमीन पर हरा चारा उगाया जाता है।

चार सौ से अधिक गायें सब देसी नस्लों की

मंदिर की गोशाला में छोटे-बड़े 400 से अधिक गोवंश हैं। सबकी सब देशी नस्ल की हैं। हरियाणा और साहीवाल के अलावा बड़े थन और मुड़ी सींग वाली गिर (गुजरात) नस्ल की गायें अलग से लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं। यह वही प्रजाति है जिसका एक दिन में दुनिया में एक दिन में सर्वाधिक दूध देने का रिकार्ड है।

गोशाला नहीं इसे खजाना मानिए

पशु चिकित्सक डा.बीके सिंह और डा.संजीव श्रीवास्तव के अनुसार यह गोशाला नहीं खजाना है। केंद्र सरकार देसी नस्ल की जिन गायों के संरक्षण एवं संवद्र्धन के लिए गोकुल और गोकुल ग्राम जैसी योजनाएं चला रही हैं उसके मद्देनजर। अगर इसे व्यवस्थित कर दिया जाय तो यह पूरे देश में नजीर बन सकती है।

यह भी पढ़ें- योगी की आहट पहचानती हैं गोशाला की गायें, पास आने की रहती होड़

यह भी पढ़ें- इलाहाबाद नगर निगम ने दो अवैध बूचडख़ाना को किया सील

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं m.jagran.com पर
Web Title:UP CM Yogi Adityanath Loves Cow(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

कमेंट करें

कैबिनेट ने लगायी जीएसटी विधेयकों पर मुहर... तो योगी के साथ लखनऊ जाएगी प्यारी बिल्ली और कालू
यह भी देखें