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सौर ऊर्जा के स्टोरेज सिस्टम का बाजार भी हो विकसित

Publish Date:Sun, 21 May 2017 01:34 AM (IST) | Updated Date:Sun, 21 May 2017 05:54 AM (IST)
सौर ऊर्जा के स्टोरेज सिस्टम का बाजार भी हो विकसितसौर ऊर्जा के स्टोरेज सिस्टम का बाजार भी हो विकसित
देश में सौर ऊर्जा के बढ़ते बाजार को लेकर बिजली कंपनियां उत्साहित हैं।

नितिन प्रधान, नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ रहे सौर ऊर्जा बाजार को लेकर बिजली कंपनियां उत्साहित हैं। परंपरागत से लेकर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन से जुड़ी टाटा पावर के प्रबंध निदेशक व सीईओ अनिल सरदाना मानते हैं कि नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन का स्तर जिस तरह से बढ़ रहा है उसी लिहाज से इस ऊर्जा के स्टोरेज सिस्टम का बाजार भी तेजी से विकसित होने की जरूरत है ताकि इसकी कीमतों में कमी आ सके। दैनिक जागरण से बातचीत में सरदाना ने कहा कि उम्मीद है देश में ऐसी स्थिति जल्द बनेगी। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :-

क्या आप मानते हैं कि देश में रूफटॉप सोलर और नवीकरणीय ऊर्जा स्टोरेज डिवाइस का बाजार रफ्तार पकड़ रहा है? इसकी रफ्तार को और कैसे बढ़ाया जा सकता है।

-देखिए सोलर रूफटॉप की अवधारणा देश में सतत रफ्तार से बढ़ रही है। आने वाले समय में यह वाणिज्यिक, औद्योगिक और महंगी आवासीय इकाइयों के क्षेत्र में इसके लिए बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे। सोलर रूफटॉप सिस्टम के अमल की रफ्तार और तेज हो सकती है बशर्ते इनके लिए आसान वित्त की उपलब्धता हो। वाणिज्यिक और औद्योगिकी ग्राहकों के लिए यह काफी उपयोगी और आर्थिक दृष्टि से लाभकारी विकल्प हो सकता है। अन्य परंपरागत स्त्रोतों से बिजली लेना इस क्षेत्र के लिए महंगा पड़ता है। इसी तरह बड़ी आवासीय इकाइयों और हाउसिंग सोसायटी के लिए छतों पर सोलर पैनल प्लांट लगाना आर्थिक दृष्टि से काफी फायदेमंद हो सकता है।

देश में नवीकरणीय ऊर्जा के स्टोरेज सिस्टम का बाजार अभी अपनी शैशवास्था में है। लेकिन आने वाले वर्षो में इसके तेज विकास की उम्मीद है। हालांकि यह तभी हो पाएगा जब ऊर्जा के स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह संभव भी है क्योंकि इलेक्टि्रक व्हीकल के चलन के बाद इसकी मांग बढ़ेगी।

 क्या नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र को लेकर नियमन संबंधी भी कुछ चिंताएं हैं?

-इस क्षेत्र में कुछ मुद्दे अभी ऐसे हैं जिनके बारे में अभी स्पष्टता आना बाकी है। इनमें अंतर क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता, सौर ऊर्जा उत्पादन करने वाली कंपनियों को भुगतान में होने वाली देरी, नियामक संबंधी अनिश्चितताएं और पावर परचेज एग्रीमेंट होने में लगने वाली देरी प्रमुख हैं। इनमें से कुछ को तो जल्द सुलझाया जा सकता है जबकि अंतर क्षेत्रीय ट्रांसमिशन क्षमता स्थापित करने में लंबे वक्त की दरकार होगी।

 केंद्र सरकार की उदय योजना के बारे में आपके क्या विचार हैं?

-उदय राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के सभी पुरानी समस्याओं को स्थायी तौर पर सुलझाने और भविष्य की संभावनाओं के दोहन का बेहतर विकल्प देती है। इससे देश में कुशल और प्रभावी डिस्कॉम तैयार करने में मदद मिलेगी। उदय के जरिए डिस्कॉम आने वाले कुछ सालों में ही अपने नुकसान को खत्म कर पाएंगी। उदय का एक फायदा यह भी होगा कि 2017-18 से बिजली वितरण कंपनियों को होने वाला घाटा राज्य के राजकोषीय घाटे में परिलक्षित होगा। यह स्कीम 2019 तक सभी को बिजली पहुंचाने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में मददगार साबित होगी।

 टाटा पावर किस तरह की विस्तार योजनाओं पर काम कर रही है?

-कंपनी 2025 तक देश में 20000 मेगावाट की क्षमता स्थापित करना चाहती है। हम इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहे हैं। कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं। आने वाले कुछ वर्ष देश का फोकस नवीकरणीय ऊर्जा पर रहेगा। इस दिशा में भी टाटा पावर के पास एक स्पष्ट योजना है। इस दिशा में कंपनी पहले की भांति 1500 से 2000 करोड़ रुपये सालाना का पूंजीगत व्यय करती रहेगी। सरकार 2022 तक देश में 100 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करना चाहती है। सरकार की इस दिशा के अनुरूप टाटा पावर भी सौर ऊर्जा पर फोकस कर रही है। विद्युत उत्पादन क्षमता में हम अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी को 2025 तक 30 से 40 फीसद तक ले आएंगे।

 क्या विदेशों में विस्तार की भी योजना है?

-देखिए टाटा पावर के लिए भारतीय बाजार प्राथमिकता में बना रहेगा। ऐसी आशंकाएं हैं कि कई वजहों से आगे चलते हुए अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसे देखते हुए टाटा पावर ने भारत के बाहर निवेश करना शुरू किया है। कंपनी अन्य देशों में 2600 मेगावाट की क्षमता स्थापित करना चाहती है। इनमें दक्षिण अफ्रीका, सब-सहारा देश, इंडोनेशिया, वियतनाम, तुर्की और मध्य पूर्व देश शामिल हैं।

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Web Title:The market of solar energy storage system should be also developed(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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