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रणनीतिक मैत्री को नई दिशा देंगे मोदी और एबी

Publish Date:Mon, 11 Sep 2017 09:15 PM (IST) | Updated Date:Wed, 13 Sep 2017 06:10 PM (IST)
रणनीतिक मैत्री को नई दिशा देंगे मोदी और एबीरणनीतिक मैत्री को नई दिशा देंगे मोदी और एबी
अहमदाबाद में होगी दोनों देशों की चौथी सालाना बैठक, तीसरे देशों में मिल कर परियोजना लगाना एजेंडे में उपर...

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी ने जिन देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय रिश्तों को बिल्कुल नई परिभाषा दी है उसमें जापान भी शामिल है। जापान के साथ भारत के रिश्ते किस तरह से बदले हैं, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि पिछले तीन वर्षो में मोदी और जापान के पीएम शिंजो एबी की दस बार मुलाकात हो चुकी है। 11वीं बार इन दोनों की आधिकारिक तौर पर मुलाकात गुरुवार को अहमदाबाद में होगी। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) प्रणय वर्मा का कहना है कि 'दोनो प्रधानमंत्रियों की मुलाकात भारत व जापान के भावी रिश्तों की नींव रखेंगे।'

मोदी और एबी की अहमदाबाद में हो रही मुलाकात कई मायने में अहम होगी। सबसे पहले तो इससे यह पता चलता है कि कूटनीतिक मामलों में राज्यों की भागीदारी बढ़ रही है। जिस तरह से दूसरे देश के राष्ट्र प्रमुख की आगवानी में राष्ट्रपति रात्रि भोज देते हैं उसी तरह से इस बार गुजरात के मुख्यमंत्री एबी की आगवानी में दावत देंगे। दूसरा, दोनो पीएम मिल कर भारत के पहले हाई स्पीड रेल कारीडोर (अहमदाबाद से मुंबई) का शिलान्यास रखेंगे। यह परियोजना आने वाले दिनों में भारत-जापान मैत्री का एक तरह से शो केस होगा।

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत-जापान की इस 12वीं सालाना बैठक के एजेंडे में मुख्य तौर पर रणनीति से जुड़े मसले सबसे उपर होंगे। हाल ही में चीन के साथ डोकलाम विवाद पर जापान ने जिस तरह से मुखर तौर पर भारत का समर्थन किया है उसके बाद यह बैठक और अहम हो जाती है। दोनो देशों के बीच हथियार निर्माण में सहयोग पर पिछले कुछ वर्षो से बातचीत चल रही है। जानकारों का कहना है कि अब यह बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। मोदी और एबी इसे अमली जामा पहनाने का रोडमैप दे सकते हैं। इसके अलावा इनके बीच सैन्य सहयोग के क्षेत्र में सहयोग बढ़ा है लेकिन दोनो देश मान रहे हैं कि अभी संभावनाएं काफी ज्यादा है। खास तौर पर सैन्य अभ्यास के क्षेत्र में। हाल ही में रक्षा मंत्री अरुण जेटली की जापान यात्रा के दौरान यह सहमति बनी है कि मालबार सैन्य अभ्यास का विस्तार किया जाएगा। भारत व अमेरिका के बीच होने वाले इस नौ सैनिक अभ्यास में जापान भी शामिल हो रहा है।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि भारत व जापान मिल कर तीसरे देश में बुनियादी ढांचे के विकास पर पहले ही तैयार हो चुके हैं। अब इन्हें यह तय करना है कि किन किन देशों में किन परियोजनाओं को शुरु किया जाए। जापान पहले ही श्रीलंका (हमबनटोटा) और ईरान (चाबहार) में पोर्ट बनाने में भारत की मदद करने की इच्छा जता चुका है। इसके अलावा दोनो देश अफ्रीका में रेल व सड़क मार्ग बनाने में रुचि रखते हैं। इस बारे में अप्रैल, 2017 में साझी रणनीति की घोषणा की गई थी। मोदी और एबी की अगुवाई में अब इसे तेजी से आगे बढ़ाने की घोषणा हो सकती है।

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Web Title:Modi and Abe will give new direction to strategic friendship(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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