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प. बंगाल में टोल पर सेना तैनाती के बाद ममता ने राज्य सचिवालय में डेरा डाला

Publish Date:Fri, 02 Dec 2016 04:29 AM (IST) | Updated Date:Fri, 02 Dec 2016 09:42 AM (IST)
प. बंगाल में टोल पर सेना तैनाती के बाद ममता ने राज्य सचिवालय में डेरा डाला
ममता ने सवाल किया कि सिर्फ बंगाल में ही इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही? दूसरे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं देखने को मिल रहा?

राज्य ब्यूरो, कोलकाता : नोटबंदी के बाद मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी अब राज्य के विभिन्न टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती को लेकर केंद्र के खिलाफ मुखर हुई हैं। उन्होंने गुरुवार को इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया और कहा कि जब तक सेना नहीं हटेगी, तब तक वे भी राज्य सचिवालय नवान्न से नही हटेंगी। ममता ने कहा कि राज्य को अंधकार में रखकर कुछ जगहों पर सेना के जवान तैनात कर दिए गए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव बासुदेव बनर्जी केंद्र को पत्र लिखेंगे। वह खुद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संपर्क कर इसकी जानकारी देंगी।

ममता ने सवाल किया कि सिर्फ बंगाल में ही इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही? दूसरे राज्यों में ऐसा क्यों नहीं देखने को मिल रहा? यह संघीय ढांचे पर प्रहार है। नवान्न संवेदनशील इलाका है। उसके पास स्थित विद्यासागर सेतु पर इस तरह सेना की तैनाती ठीक नहीं है। कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार के कहने पर भी सेना नहीं हट रही। जब तक सेना नहीं हटेगी, तब तक वे भी नवान्न में डटी रहेंगी।

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गौरतलब है कि दिल्ली और कोलकाता को जोड़ने वाले दो राष्ट्रीय राजमार्ग के डानकुनी और पालसिट टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को सूचित किए बिना सेना के जवान तैनात कर दिए गए हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उनकी जानकारी में इस तरह कभी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री ने केंद्र पर संघीय ढांचे और लोकतंत्र को आघात पहुंचाने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या अघोषित आपातकाल लागू हो गया है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी कौन सी स्थिति पैदा हो गई है कि केंद्र राज्य सरकार को सूचित करने की भी जरूरत नहीं समझी। यह राजनीतिक प्रति¨हसा के तहत उठाया गया कदम है। संघीय ढांचे को ध्वस्त किया जा रहा है। आपातकाल लागू करने की स्थिति में भी राष्ट्रपति को इसके बारे में बताना पड़ता है। कोई बड़ी आपदा या दंगा होने पर राज्य सरकार सेना की मदद मांगती है लेकिन सामान्य स्थिति में सेना की कोई जरूरत नहीं पड़ती। आज बंगाल में सेना उतारी गई, कल बिहार, यूपी और तमिलनाडु समेत अन्य राज्यों में सेना उतरेगी। सभी राज्यों को इसके बारे में जानने की जरूरत है। यह तो घोषित आपातकाल से भी खतरनाक है। यह बहुत गंभीर मामला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों के साथ नये नोटों के वितरण की प्रक्रिया में भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि रिजर्व बैंक इस संबंध में आंकड़ों के साथ सामने आए। 100 और 50 रुपये के नोट नहीं मिल रहे हैं। रिजर्व बैंक ने किस राज्य को कितने रुपये भेजे हैं, इसके बारे में भी उन्हें जानने का अधिकार है।

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यह रुटीन अभ्यास है : सेना

दूसरी ओर कोलकाता में रक्षा मंत्रालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विंग कमांडर एसएस बिर्दी ने कहा कि यह एक वार्षिक अभ्यास कार्यक्रम है, जो हर साल सुरक्षा के लिहाज से पूरे देश में अहम सड़कों व हाइवे पर किया जाता है। इसके तहत सेना सड़कों की वार्षिक क्षमता का आंकड़ा जुटाती हैं जिससे आपातकालीन स्थिति में काम करने में आसानी हो। यह तीन दिवसीय अभ्यास शुक्रवार को भी जारी रहेगा।

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Web Title:Mamata Banerjee refuses to leave office over army deployment at toll plazas(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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