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सोनिया के वीटो से पार लगा जाट आरक्षण

Publish Date:Sun, 09 Mar 2014 08:47 AM (IST) | Updated Date:Sun, 09 Mar 2014 08:49 AM (IST)
सोनिया के वीटो से पार लगा जाट आरक्षण

[मुकेश केजरीवाल], नई दिल्ली। संप्रग सरकार का जाट आरक्षण पर अंतिम अहम राजनीतिक फैसला इतना आसान नहीं रहा है। पिछले हफ्ते कैबिनेट की जिस बैठक में इसे मंजूरी दी गई, वहां कई अनोखे घटनाक्रम हुए। लगभग एक घंटे तक कैबिनेट के सदस्य बैठ कर प्रधानमंत्री का इंतजार करते रहे। यहां तक कि मंत्रियों को इसका कैबिनेट नोट भी नहीं मिला। लेकिन संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के वीटो की वजह से आखिरकार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट को इसे पास करना पड़ा।

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सूत्रों के मुताबिक मनमोहन सिंह सरकार जहां राहुल गांधी के बताए भ्रष्टाचार विरोधी बिलों को पास करवाने की जद्दोजहद में जुटी थी, ठीक उसी दौरान जाट आरक्षण को कैबिनेट से पास करवाना राजनीतिक दबाव में ही मुमकिन हो सका। इसके लिए राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) अध्यक्ष और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने सोनिया से मिलकर जाटों के दबदबे वाले राज्यों में चुनावी नैया पार करने के लिए इसे हर हाल में अनिवार्य बताया। चुनाव के लिहाज से इसकी जरूरत पर तो सोनिया सहमत हो गई थीं, मगर वह इससे जुड़े तकनीकी पहलुओं को भी तौलना चाहती थीं। ऐसे में उन्होंने पहले वित्त मंत्री चिदंबरम और फिर कानून मंत्री कपिल सिब्बल को बुलाकर बात की। संतुष्ट होने के बाद उन्होंने पीएम को इसके लिए कहा। लेकिन विशेष तौर पर बुलाई गई कैबिनेट बैठक में भी मंत्रियों को शुरुआत के एक घंटे तक पीएम का इंतजार करना पड़ा। मनमोहन सिंह बैठक में पहुंचे भी तो कैबिनेट नोट नहीं था। ऐसे में सामाजिक न्याय मंत्रालय की संयुक्त सचिव गजाला मिनाई को वहां बुलाया गया। कैबिनेट सचिवालय के कर्मियों की मदद से यह नोट तैयार किया जा सका।

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Web Title:jat reservation came in existence on sonia's veto power(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)
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  • ajay kumar | Updated Date:09 Mar 2014, 11:13:37 AM

    सोनिया गांधी हर तबके और हर समाज की बात करती हैं. आजतक कांग्रेस की इतिहास उठाकर देख लें पता चल जाएगा. कांग्रेस पार्टी शुरु से ही समावेशी विकास की बात करती है. चाहे वो दलित हों पिछड़ी हों, अल्पसंख्यक हों या सवर्ण. अगर तमाम राजनीतिक दलों में देखा जाए तो कांग्रेस ही एक ऐसा पार्टी है जो न किसी धर्म न किसी जाति की राजनीति करती है. बल्कि जो न्याय संगत होता है सोनिया गांधी उसे अमल में लाने के लिए आगे आती है. ये उनका नेक विचार है.

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