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डराते आंकड़ों के हिस्सा थे प्रद्युम्न-अरमान, सच में दिल्ली-NCR में लगता है डर

Publish Date:Wed, 13 Sep 2017 04:10 PM (IST) | Updated Date:Wed, 13 Sep 2017 07:28 PM (IST)
डराते आंकड़ों के हिस्सा थे प्रद्युम्न-अरमान, सच में दिल्ली-NCR में लगता है डरडराते आंकड़ों के हिस्सा थे प्रद्युम्न-अरमान, सच में दिल्ली-NCR में लगता है डर
प्रद्युम्न की मां को अगर मालूम रहा होता कि रेयान स्कूल के वॉशरूम में उसके बेटे पर मौत मंडरा रही है, तो शायद वो उसे स्कूल नहीं भेजती।

नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क]।  दिल्ली और एनसीआर में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले दर्ज होते ही रहते हैं। लेकिन जुलाई और अगस्त की दो घटनाओं ने दिल को झकझोर कर रख दिया। दिल्ली से महज 15 किमी दूर गाजियाबाद के जीडी गोयनका स्कूल में अरमान की मौत और करीब इतनी ही दूरी पर गुड़गांव के रेयान स्कूल में प्रद्युम्न का कत्ल बहुत कुछ कहता है। इन दोनों स्कूलों में सिर्फ मासूम बच्चों की मौत नहीं हुई, बल्कि भरोसे और इंसानियत का भी कत्ल हुआ। जीडी गोयनका और रेयान स्कूल में फर्क सिर्फ इतना है कि ये दोनों स्कूल दो अलग-अलग इलाकों में हैं। लेकिन इन दोनों स्कूलों में समानताएं ज्यादा हैं। दोनों स्कूलों में मासूम बच्चों की मौत हुई, अव्यवस्था का आलम दिखा।

फीस और वार्षिक शुल्क के नाम पर लाखों वसूलने वाले ये स्कूल सुरक्षा और सुविधा के बड़े-बड़े दावे करते हैं। लेकिन ये तो सच है कि अरमान अब इस दुनिया में नहीं है, प्रद्युम्न भी काल के गाल में समा गया। पुलिस प्रशासन जहां अरमान के मामले में जांच कर रही है, वहीं प्रद्युम्न के मामले में आरोपी बस कंडक्टर को गिरफ्तार कर चुकी है। लेकिन पुलिस की जांच एक मां के उन सवालों का जवाब नहीं दे पा रही है जिसमें वो पूछती है कि जिस समय उसके बेटे को बेरहमी से मारा गया होगा, क्या किसी ने उसकी आवाज नहीं सुनी। ये सिर्फ अरमान या प्रद्युम्न का एकलौता मामला नहीं है, देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर के इलाके में बच्चों और उनके अभिभावकों में असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है। 

डराती है ये तस्वीर

- दिल्ली में हर महीने पांच बच्चियां यौन शोषण की शिकार ।

- पिछले आठ महीने में आए 38 मामले ।

- महानगरों के ज्यादातार मामले हैं, जिनमें स्कूली बच्चे ज्यादा ।

- देशभर में अगस्त 2017 तक 258 बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आया ।

- बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में 2015 में 9 हजार से ज्यादा मामले दर्ज ।

- 2015 में देशभर में करीब 94 हजार मामले बच्चों से अपराध के संबंध में दर्ज ।

- बच्चों पर जुल्म के मामले में देश में दिल्ली सबसे ऊपर।

- प्रति लाख बच्चों पर 169 केस दर्ज ।

- अंडमान निकोबार में 75 केस दर्ज ।

चंडीगढ़ - 68 केस 

मध्यप्रदेश- 43 केस

महाराष्ट्र- 37 केस

- देश में प्रति लाख बच्चों पर कुल 21 मामले ।

जानकार ही कुचल रहे हैं बचपन

- करीब 95 फीसद मामलों में दुष्कर्म करने वाले परिचित ।

- करीब 36 फीसद अपराध पड़ोसियों द्वारा किए गए।

- करीब 10 फीसद मामलों में परिवार के लोग या रिश्तेदार शामिल ।

(एनसीआरबी क्राइम इन इंडिया 2015 की रिपोर्ट)

इन आंकड़ों को देखकर और पढ़कर आपका सिहरना लाजिमी है। बड़े-बड़े शहरों के नामी गिरामी स्कूलों के बारे में जब हमने दिल्ली, गाजियाबाद और गुड़गांव के लोगों से उनकी प्रतिक्रियाओं को जानने की कोशिश में एक महिला अभिभावक ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चे की बेहतरी के लिए नामचीन स्कूल में दाखिला कराया। लेकिन रेयान स्कूल और जीडी गोयनका में मासूम बच्चों के साथ हादसे से वो डरी हुई हैं। बच्चे को घर से स्कूल भेजने और स्कूल से घर आने तक वो चिंतित रहती हैं। दाखिले के वक्त बड़े-बड़े स्कूल बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन हकीकत आप सभी लोग देख रहे हैं।

 

जानकार की राय

Jagran.Com से खास बातचीत में डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय के डॉ आरपी तिवारी ने कहा कि दिल्ली दरअसल मेल्टिंग पॉट की तरह है। देश के अलग-अलग हिस्सों से अलग-अलग परिवेश के लोग आते हैं। बहुत लोगों की आर्थिक-सामाजिक पृष्ठभूमि बेहतर नहीं होती है। मेट्रो शहरों की चमक-दमक और कम आय की वजह से अपराध की तरफ मुड़ जाना स्वभाविक है। जहां तक महिलाओं और मासूम बच्चों के साथ यौन हिंसा का मामला है तो उसके लिए परवरिश जिम्मेदार है। सामान्य तौर वो शख्स जो कामुक प्रवृत्ति का होता है, उसके लिए हर एक शख्स सिर्फ शिकार होता है। जहां तक स्कूलों में वारदात के मामले हैं तो ये पूरी तरह से स्कूल प्रबंधन की नाकामी है। स्कूल प्रबंधन की ये जिम्मेदारी है कि जिस शख्स की जो जिम्मेदारी है, वो अपने दायरे में निभाए। इसके अलावा अब बच्चों को शुरुआत से ही आत्मरक्षा की ट्रेनिंग देने की जरूरत है, ताकि वो अपने आपको कुछ हद तक सुरक्षित रख सकें।

प्रद्युम्न केस में कोई और हो सकता है शामिल

रेयान स्कूल में प्रद्युम्न के साथ हादसे में अब तक बस कंडक्टर गिरफ्तार हो चुका है। रेयान स्कूल के दो अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही स्कूल की सर्वेसर्वा पर गिरफ्तारी का तलवार लटक रही है। लेकिन अब जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक प्रद्युम्न की हत्या में कोई और भी शामिल हो सकता है।रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या मामले में नया मोड़ आया है। इस घटना की जांच के लिए गठित एसआइटी ने माना है कि स्कूल में सुबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है और प्रद्युम्न की हत्या में किसी एक अन्य शख्स की भी भूमिका संभावित है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य हत्यारा संभवत: वारदात को अंजाम देने के बाद शौचालय की टूटी खिड़की के रास्ते से भाग गया।

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो गई है कि प्रद्युम्न का यौन शोषण नहीं हुआ था। दैनिक जागरण ने भी खबर दी थी कि प्रद्युम्न के साथ यौन शोषण नहीं हुआ है। इस बीच स्कूल की निलंबित प्रिसिंपल नीरजा बत्रा से पुलिस ने मंगलवार को दो घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ की थी। नीरजा ने पुलिस को बताया कि वह तमाम मुद्दों पर मेल द्वारा, फोन पर निदेशक को बताती रही हैं, लेकिन प्रबंधन ने कभी उनकी बातें नहीं मानीं। उन्होंने साक्ष्य भी पेश किए। पुलिस का कहना है कि नीरजा को गिरफ्तार नहीं किया गया है और वह जांच में सहयोग कर रही हैं। जरूरत पड़ी तो उनसे फिर पूछताछ की जाएगी। गौरतलब है कि नीरजा को सोमवार को पुलिस ने नोटिस देकर बुलाया था, लेकिन तबीयत खराब होने के चलते वह पूछताछ के लिए नहीं गईं थी। प्रद्युम्न की हत्या के बाद नीरजा को स्कूल प्रबंधन ने निलंबित कर दिया था। 

नेताओं पर बरसे प्रद्युम्न के पिता

प्रद्युम्न के घर पर मंगलवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और राज्यसभा के सदस्य शरद यादव सांत्वना देने पहुंचे। सांत्वना देने हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर भी पहुंचे। प्रद्युम्न के पिता वरुण चंद ठाकुर ने शरद यादव और जीतनराम मांझी को खूब सुनाया। ठाकुर का कहना था कि स्कूलों में बच्चा सुरक्षित नहीं है, स्कूल वाले अपनी मनमानी कर रहे हैं तो इसके पीछे आप (राजनेता) जैसे लोग हैं जो किसी न किसी स्कूल के साथ जुड़े रहते हैं और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। आप लोगों को इस पर ध्यान देना होगा, क्योंकि आज मेरा बच्चा गया है, कल किसी और का बच्चा खत्म हो जाएगा।

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Web Title:Jagran Special Pradyumna Arman part of these scary figures in reality the Delhi NCR seems to be scared(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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