PreviousNext

'पाकिस्तान को ये समझना चाहिए आतंक का कोई धर्म नहीं होता'

Publish Date:Wed, 12 Jul 2017 11:03 AM (IST) | Updated Date:Wed, 12 Jul 2017 11:31 AM (IST)
'पाकिस्तान को ये समझना चाहिए आतंक का कोई धर्म नहीं होता''पाकिस्तान को ये समझना चाहिए आतंक का कोई धर्म नहीं होता'
लश्कर के संदिग्ध आतंकी संदीप शर्मा की गिरफ्तारी के बाद पाक मीडिया कश्मीर में हिंसा के लिए हिंदू आतंकवाद को जिम्मेदार बताने की कोशिश कर सकता है।

उमेश चतुर्वेदी

जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार लश्कर-ए-तैय्यबा के संदिग्ध आतंकवादी संदीप शर्मा की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा बलों का आतंक और अपराध के नए मॉड्यूल को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक है। मगर एक-दो दिनों में पाकिस्तानी संचार तंत्र में कश्मीर में जारी खून-खराबे के लिए हिंदू आतंकवाद को जिम्मेदार ठहराने की कोशिशें जरूर तेज हो सकती हैं।


याद कीजिए 26 नवंबर 2008 को मुंबई में आतंकी हमले को। सुरक्षा बलों से मुठभेड़ के दौरान मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों के हाथों में कलावा बंधा मिला था। इसने पाकिस्तानी टेलीविजन चैनलों को बहस को मोड़ने का आधार दे दिया था। उनका तर्क था कि मुसलमान कलावा नहीं बांधते, लिहाजा मुंबई के हमलावर हिंदू हैं। इस बहाने उस दौरान पाक मीडिया ने यह साबित करने की कोशिश जरूर की कि हमलावर पाकिस्तानी नहीं थे। यह तो संयोग रहा कि कसाब जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया और हिंदू आतंकवाद की अवधारणा को पुष्ट करने की पाकिस्तानी कोशिश नाकाम हो गई। नौ साल पहले के हमले में मारे गए आतंकियों के हाथों में सिर्फ कलावा ही बंधा था, इस बार सचमुच हिंदू युवा ही गिरफ्तार किया गया है। इसलिए पाक मीडिया की ओर से यह साबित करने की कोशिश अब तेज हो सकती है कि कश्मीरी आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान का हाथ नहीं है।

मुजफ्फरनगर के संदीप शर्मा की गिरफ्तारी आतंकवाद और अपराध के कॉकटेल की तरफ भी इशारा करती है। अपनी गिरफ्तारी के बाद संदीप ने जिस तरह एटीएम लूट में अपने हाथ होने की बात स्वीकार की है, उससे यही साबित होता है कि उसने आतंकवाद को पैसा कमाने का जरिया बना लिया। आतंकवाद और अपराध का रिश्ता पहली बार सामने नहीं आया है। नक्सल प्रभावित इलाकों से भी अपराधियों द्वारा नक्सलियों के नाम पर लेवी वसूलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। कई बार विचारधारा की बजाय पैसे कमाने के नाम पर भी अपराधी नक्सली गतिविधियों में शामिल होते रहे हैं।

आतंकवाद और अपराध का कॉकटेल सही मायने में पूर्वोत्तर के आतंक प्रभावित इलाकों में देखा जा सकता है। मगर संदीप की गिरफ्तारी इन मायने में अलग है। उसकी गिरफ्तारी ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान उस मान्यता की ओर दिलाया है कि आतंकवादी का कोई धर्म नहीं होता। वैसे भी अपने देश में सेक्युलरवाद के नाम पर आतंकवाद को भी संतुलित करने की कोशिश होती रही है। हिंदू आतंकवाद शब्द कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह पहले ही दे चुके हैं। वोट बैंक की राजनीति के चलते आतंकवाद को भी संतुलित करने की खतरनाक कोशिश का अंजाम देश देख रहा है। इस बार भी अगर कश्मीर में पकड़े गए आतंकी को उसके नए नाम आदिल की बजाय अगर संदीप की ही पहचान से दिखाया-समझाया जा रहा है तो इसके पीछे वही पुरानी आतंकवाद को संतुलित करने की प्रवृत्ति ही ज्यादा काम कर रही है। बेशक आतंकवाद के लिए आतंकवादी के पूरे सामाजिक समुदाय को दोषी नहीं माना जा सकता।

ऐसा मानना भी गलत ही होगा लेकिन अगर किसी खास समुदाय के ही ज्यादातर लोग आतंकवाद के राह पर जा रहे हैं तो यह सोचना ही होगा कि आखिर उस सामाजिक तंत्र में क्या है कि ऐसा हो रहा है। मोटे तौर पर देखने से यह बात सामने आती है कि आधुनिक राष्ट्र राज्य का प्रतिकार जिस समुदाय की धमनियों में हिंसक तरीके से बह रहा है, उसके ही युवा आतंकवाद की तरफ ज्यादा जा रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपने धार्मिक तरीके से मौजूदा राष्ट्र राज्य की व्याख्या करनी है और व्यवस्था चलानी है।

चूंकि आज के दौर में दुनियाभर में कहर बरपा रहे आतंकवाद की जड़ इस्लाम में कहीं ज्यादा है। इसलिए संदीप को भी पता था कि वह अपने मूल नाम से कम से कम कश्मीर घाटी में आतंकवादी के तौर पर काम नहीं कर सकता, लिहाजा उसने भी धर्म बदल लिया और आदिल नाम रख लिया। अपुष्ट खबरें तो यहां तक आ रही हैं कि उसने कश्मीरी मुस्लिम लड़की से शादी भी कर ली है। दसवीं पास करने के बाद रोजी-रोटी की तलाश में निकले संदीप को कश्मीर घाटी में ठिकाना मिला। जहां वह निर्माण उद्योग में काम करके बारह हजार रुपये महीने की कमाई करने लगा था लेकिन यह रकम उसे छोटी पड़ने लगी थी। कम पढ़ा-लिखा होने के चलते उसकी कमाई बढ़ भी नहीं सकती थी। लिहाजा जैसे ही उसे बरगलाने वाले मीठे शब्द मिले, उसने अपना ईमान बदलने में देर नहीं लगाई।

वैसे हर अपराधी अपना ईमान जब बदलता है, अपनी आत्मा की सच्ची आवाज को अनसुनी करता है, तभी वह अपराध के दलदल में समाता है। मगर आम अपराधियों और संदीप जैसे अपराधियों में एक अंतर है। आम अपराधियों में से अधिसंख्य की आस्था मौजूदा राष्ट्र राज्य के सिद्धांत के द्वारा पोषित मौजूदा राष्ट्र के प्रति होती ही है। कश्मीरी पत्रकार इफ्तार गिलानी को दुर्भाग्यवश छह महीने तक बगैर किसी गलती के तिहाड़ जेल में रहना पड़ा था। तब उन्हें देशद्रोह के आरोप का सामना करना पड़ा था। बेशक वह इस आरोप से बाइज्जत बरी हुए, लेकिन उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर जो किताब लिखी है, उसमें साफ जिक्र किया है कि जेल में खूंखार कैदी भी देशद्रोही होने के चलते उनसे बदसलूकी करते थे। इस अनुभव से जाहिर है कि संदीप बाकी अपराधियों से अलग है।

यह अलगाव ही है कि उसका भाई सार्वजनिक रूप से उसे गोली मारने का बयान दे रहा है। संदीप की गिरफ्तारी से एक और आशंका को बल मिलता है, वह कि अब आतंकवादी पैसे का लोभ देकर घाटी से बाहर के भी युवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे मध्य प्रदेश में कुछ महीने पहले आइएसआइएस का जो नेटवर्क पकड़ा गया था, उसमें शामिल युवाओं में हिंदू भी थे और पूछताछ में सामने आया कि वे पैसे के लोभ में ऐसा कर रहे थे। ऐसे में सुरक्षा बलों और खुफिया तंत्र की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे घाटी के बाहर के युवाओं को पैसे के लोभ में गुमराह होने और आतंकियों के हाथ में जाने से रोकने के लिए उपाय तो करें ही।

अब तक माना जाता रहा है कि घाटी में पत्थरबाजी करने वाले युवाओं को बरगलाने की वजह उनकी बेरोजगारी है। लेकिन अब यह बेरोजगारी या कम कमाई घाटी के बाहर के युवाओं को भी गुमराह कर रही है। इसलिए इस बेरोजगारी और कम कमाई वाले हाथों को महंगाई के दौर में उचित काम और मजदूरी दिलाने की व्यवस्था पर भी बात होनी चाहिए।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
 

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं m.jagran.com पर
Web Title:jagran special Expert says there is no religion of terrorism(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

कमेंट करें

मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी के समक्ष पेश हुए लालू यादव के दामादअमरनाथ यात्रा : मां के तोहफे का इंतजार कर रही थी बेटी, पहुंची अर्थी
यह भी देखें