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कहीं निक्सन की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप को भी न छोड़ना पड़ जाए पद!

Publish Date:Fri, 19 May 2017 03:57 PM (IST) | Updated Date:Sat, 20 May 2017 01:00 PM (IST)
कहीं निक्सन की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप को भी न छोड़ना पड़ जाए पद!कहीं निक्सन की तरह ही डोनाल्ड ट्रंप को भी न छोड़ना पड़ जाए पद!
डोनाल्ड ट्रंप का संकट उन्हें ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को परेशान कर रहा है। ट्रंप पर छाए संकट के बादल अब बाजार को भी अपनी जद में ले रहे हैं।

नई दिल्ली, [स्पेशल डेस्क]। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्हें हिलेरी क्लिंटन के सामने कहीं नहीं माना जा रहा था। लेकिन उन्होंने सभी विश्लेषकों और आलोचकों को चौंकाते हुए चुनाव जीत लिया। उनके चुने जाने के साथ ही एक विवाद ने भी जन्म लिया जो उनके लिए अब मुसीबत का सबब बनता जा रहा है।

रूस की हैकिंग के सहारे जीते ट्रंप!

डोनाल्ड ट्रंप का बिजनेस दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है। उनके रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से भी अच्छे संबंध रहे हैं। इसी के चलते आरोप है कि रूस ने अपने पसंदीदा उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में जीत दिलाने के लिए भरपूर मदद की। पुतिन और हिलेरी क्लिंटन के खराब रिश्तों के कारण भी इस आशंका को बल मिला। ट्रंप की टीम पर आरोप है कि राष्ट्रपति चुनाव के दौरान वह रूस के संपर्क में बने हुए थे। हालांकि रूस और डोनाल्ड ट्रंप दोनों ही इस तरह के आरोपों को कई बार खारिज कर चुके हैं।

 

FBI निदेशक जेम्स कोमी को हटाकर फंसे ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप और रूस के संबंधों व राष्ट्रपति चुनाव में रूस की भूमिका की जांच तत्कालीन एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी कर रहे थे। जेम्स कोमी को उनके पद से हटाए जाने पर व्हाइट हाउस की तरफ से बताया गया कि उन्हें एटर्नी जनरल जेफ सेशन्स की सिफारिश पर हटाया गया है। खुद ट्रंप ने एक चिट्ठी लिखकर जेम्स कोमी से कहा कि वह प्रभावी तरीके से एफबीआई की अगुवाई नहीं कर रहे हैं। कोमी को हटाए जाने से पहले एक खबर आयी थी कि उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस को हिलेरी क्लिंटन के ईमेल्स के बारे में गलत जानकारी दी थी। बता दें कि खुद हिलेरी क्लिंटन भी राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार के लिए जेम्स कोमी को जिम्मेदार ठहरा चुकी हैं।


पार्टी के भीतर ही ट्रंप के खिलाफ माहौल

कोमी को उनके पद से हटाए जाने के बाद कुछ दस्तावेज सामने आए, जिनसे पता चला कि ट्रंप ने कोमी से तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल फ्लिन के खिलाफ जांच बंद करने को कहा था। ज्ञात हो कि फ्लिन रूसी अफसरों से संबंधों को लेकर जांच के घेरे में थे और उन्हें अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। खबरों के मुताबिक रिब्लिकन नेता जस्टिन अमैश भी कहते हैं कि अगर यह रिपोर्ट सही पाई कि ट्रंप ने कोमी पर दबाव डाला था तो उन पर महाभियोग चल सकता है। रिब्लिकन सीनेटर जॉन मैक्केन भी ट्रंप के खिलाफ दिख रहे हैं। रिपब्लिकन सीनेटर कोलिंस ने गोपनीय सूचना लीक होने को परेशानी का सबब माना है।

ट्रंप की मुसीबत बना बाजार का संकट

डोनाल्ड ट्रंप का संकट उन्हें ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को परेशान कर रहा है। ट्रंप पर छाए संकट के बादल अब बाजार को भी अपनी जद में ले रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग चले या न चले, ऐसी खबर से विदेशी बाजारों में कमजोरी देखी गई। इसी दबाव में निवेशकों ने शेयरों की बिकवाली की और गुरुवार को सेंसेक्स 224 प्वाइंट लुढ़क गया। ट्रंप पर महाभियोग चलने की आशंका के चलते ही बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले आठ महीने की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।


महाभियोग चलेगा और राष्ट्रपति पद से हटेंगे ट्रंप?

एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी को उनके पद से हटाकर जैसे ट्रंप ने खुद के लिए मुसीबत ही मोल ले ली है। उनके खिलाफ कांग्रेस में महाभियोग का प्रस्ताव लाया जा सकता है। हालांकि ट्रंप के लिए चिंता की बात इसलिए नहीं है, क्योंकि दोनों सदनों में रिपब्लिकन को बहुमत हासिल है। लेकिन जिस तरह से उनकी ही पार्टी की सीनेटर उनके खिलाफ दिख रहे हैं, इससे उनकी मुसीबतें बढ़ती दिख रही हैं। jagran.com से बात करते हुए, 'पूर्व राजनयिक विवेक काटजू ने कहा कि महाभियोग चलाए जाने की बात कहना अभी बहुत जल्दबाजी होगी। अभी तो एक स्पेशल काउंसिल नियुक्त किया गया है और वह इस पूरे मामले को देखेगा।'

कोमी को हटाया तो अब रॉबर्ट मूलर करेंगे जांच

ट्रंप के लिए चिंताजनक बात यह है कि उनके निर्वाचन के संबंध में रूसी लिंक की जांच अब पूर्व एफबीआई निदेशक रॉबर्ट मूलर करेंगे। बता दें कि मूलर सख्त स्वभाव के और किसी के भी दबाव में न आने वाले शख्स के रूप में जाने जाते हैं। इस बारे में विवेक काटजू कहते हैं, 'मूलर पूरे मामले को देखेंगे, लेकिन अभी से इस बारे में कयास लगाना ठीक नहीं है।' अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले से सिर्फ सात दिन पहले मूलर ने जांच एजेंसी के निदेशक की जिम्मेदारी संभाली थी। वे 2013 तक एफबीआई के निदेशक रहे। रिपब्लिकन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के समय वह एफबीआई के निदेशक बने थे और बराक ओबामा के कार्यकाल में भी वे बने रहे। यही नहीं बराक ओबामा प्रशासन ने उन्हें एक्सटेंशन भी दिया था। 

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ट्रंप पर नहीं जनता को भरोसा

जिस अमेरिकी जनता ने डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति बनाया वही जनता उनसे नाराज दिख रही है। ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए गए। एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 20 जनवरी को शपथ लेने के बाद अगले करीब 15 दिन में उनके खिलाफ 17 राज्यों में 52 केस दर्ज हुए थे। बता दें कि बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के दो हफ्तों के भीतर तीन, जबकि जॉर्ज डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन के खिलाफ 4-4 मामले दर्ज हुए थे।

निक्सन पर चल चुका है महाभियोग

साल 1973 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचार्ड निक्सन ने वाटरगेट की निष्पक्ष जांच कर रहे आर्किबाल्ड कोक्स को हटा दिया था, इसके बाद उनके खिलाफ कांग्रेस में महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था। इस क्रम में निक्सन को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने पड़ा था। जिस तरह से निक्सन वाटरगेट कांड में फंसे थे उसी तरह से ट्रंप भी हैकिंग मामले में बुरी तरह से फंसे हैं। माना जा रहा है कि जेम्स कोमी को हटाना ट्रंप का अब तक का सबसे घातक कदम था। अमेरिकी लोगों का मानना है कि कोमी को हटाकर ट्रंप ने पद का दुरुपयोग किया है। 

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Web Title:How dangerous are the cracks emerging in Trumps wall of support(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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