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पांचवीं पास किसान ने बदली साथियों की तकदीर

Publish Date:Tue, 20 Jun 2017 10:36 AM (IST) | Updated Date:Tue, 20 Jun 2017 10:36 AM (IST)
पांचवीं पास किसान ने बदली साथियों की तकदीरपांचवीं पास किसान ने बदली साथियों की तकदीर
45 साल से खेती पर प्रयोग कर रहे मंगलानंद डबराल, पांच सौ किसानों को सिखा चुके हैं नकदी खेती के गुर...

टिहरी (रघुभाई जड़धारी)। गांव वाले उन्हें आधुनिक खेती का जनक मानते हैं और वह खुद को एक साधारण किसान। चंबा ब्लाक में चोपड़ीयाल गांव के 70 वर्षीय मंगलानंद डबराल ने न सिर्फ पहाड़ में खेती के तौर-तरीके बदल अपनी आर्थिकी को मजबूत किया, बल्कि अन्य किसानों को भी प्रेरित किया। नतीजा आज क्षेत्र में करीब पांच सौ किसान नगदी फसलों का उत्पादन कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। आजकल वह किसानों को कीवी उत्पादन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। पांचवी पास डबराल ने साबित कर दिया शिक्षा का अर्थ सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं है। अनुभवों का निचोड़ ही असल शिक्षा है।

यही वजह है कि क्षेत्र के कृषि अधिकारी भी उनसे सलाह-मशविरा करने से नहीं हिचकिचाते। नकदी फसल और बागवानी के लिए प्रसिद्ध चंबा- मसूरी फलपट्टी को विकसित करने में मंगलानंद डबराल का भी योगदान है। वह आज भी स्वयं काम कर युवाओं के जोश को मात दे रहे हैं। इतनी उम्र में यह सब कैसे कर लेते हैं, मुस्कराते हुए कहते हैं ‘खेत की किसान की ऊर्जा है।’ वह बताते हैं कि शिक्षा सिर्फ पांचवीं तक ही पा सके। बड़े होने पर ड्राइवरी सीखी और 1965 में कुवैत चले गए। चार साल कुवैत में रहने बाद लगा कि भटकने से बेहतर है गांव लौटा जाए। डबराल कहते हैं 1969 में गांव आने के बाद भी मन नहीं लगा।

इसी बीच उन्हें विचार आया कि पारंपरिक फसलों की बजाय कुछ हटकर किया जाए। इसी के साथ शुरू हुआ आलू, मटर, बीन, गोभी और मूली का उत्पादन। वह बताते हैं कि इससे मुनाफा तो हुआ, लेकिन पानी की कमी से सिंचाई की दिक्कत रही। इस पर उन्होंने वर्षा जल संग्रहण की योजना बनाई। जल संग्रहण के लिए टैंकों का निर्माण कराया तो समस्या का समाधान भी हो गया। डबराल खेतों में शुरू से ही जैविक खाद इस्तेमाल करते रहे हैं। उन्होंने बेटे को भी अच्छी शिक्षा दिलाई, लेकिन उसे नौकरी के बजाय खेती के लिए ही प्रेरित किया। आज वह भी खेती में हाथ बंटा रहा है। बकौल डबराल, ‘पांच साल पहले मैंने कीवी उत्पादन की तैयारी की। शुरुआत में मुश्किल हुई। फिर पॉलीहाउस में तापमान नियंत्रित कर नर्सरी तैयार की। आज एक फसल से सौ क्विंटल कीवी मिल रहा है।

डबराल खेती के बहुत बड़े जानकार हैं। उनकी प्रेरणा से मैंने भी नकदी फसलें उगानी शुरू कीं। पिछले दस सालों से सब्जी का उत्पादन कर रहा हूं। इससे घर की जरूरत पूरी होने के साथ बाजार में भी सब्जी का बेहतर मूल्य मिल रहा है।- देव सिंह पुंडीर, निवासी ग्राम सिलकोटी

मंगलानंद प्रेरणादायी काश्तकार हैं। हम भी कई बार उनके पास जाते हैं और जानकारी लेते हैं। उन्होंने स्वयं के प्रयासों से सीखा है।- डीएस नेगी, ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक

‘नकदी फसलों की तरफ मेरा रुझान डबराल जी की प्रेरणा से बढ़ा है। मैं पिछले
कई सालों से उनकी सलाह पर नकदी फसल उगा रहा हूं। इसके अलावा उनसे कीवी उत्पादन की जानकारी भी ले रहा हूं।’- सत्यपाल सिंह गुसाईं, सिलोगी चोपड़ीयाल गांव

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Web Title:Fifth pass farmers turn to fate of his associates(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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