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यूपी के सीएम योगी के पिता ने दी सलाह, समाज के हर वर्ग के लिए करें काम

योगी आदित्‍यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्‍ट ने बेटे को उत्‍तर प्रदेश का मुख्‍यमंत्री बनने के बाद एक सलाह दी है। लेकिन शायद योगी, पिता की इस सालह को ना मानें।

By Tilak RajEdited By: Published: Wed, 22 Mar 2017 10:01 AM (IST)Updated: Wed, 22 Mar 2017 10:27 AM (IST)
यूपी के सीएम योगी के पिता ने दी सलाह, समाज के हर वर्ग के लिए करें काम
यूपी के सीएम योगी के पिता ने दी सलाह, समाज के हर वर्ग के लिए करें काम

देहरादून, जेएनएन। उत्‍तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के पिता आनंद सिंह बिष्‍ट चाहते हैं कि उनका बेटा समाज के हर वर्ग के लिए काम करे, क्‍योंकि हर जाति, धर्म के लोगों ने वोट दिया है। साथ ही उन्‍होंने बेटे को सलाह दी कि अब हिंदुत्‍व प्रचारक की छवि से बाहर निकलना चाहिए।

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योगी आदित्‍यनाथ के पिता आनंद सिंह 84 साल के रिटायर्ड फोरेस्‍ट रेंजर हैं। उन्‍होंने बेटे को सलाह दी, 'अब उन्‍हें समाज के हर वर्ग को अपने साथ लेकर चलना चाहिए। बुर्के वाली महिलाओं (मुस्लिम महिलाओं) ने भी उन्‍हें वोट दिए हैं। आदित्‍यनाथ को अब हर धर्म का सम्‍मान करना चाहिए। सभी धर्म के लोगों का दिल जीतना चाहिए।'

एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्‍यू में आनंद सिंह ने कहा, 'मुस्लिम महिलाओं ने भी भाजपा को वोट दिए हैं। अब उनकी उम्‍मीदें नई सरकार पर टिकी हुई हैं, जिन्‍हें आदित्‍यनाथ को पूरा करना चाहिए। ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं का साथ देना चाहिए। आदित्‍यनाथ को यह अपने दिमाग में रखना चाहिए कि प्रदेश के लोग विकास चाहते हैं। विकास के पथ पर प्रदेश को आगे ले जाने का जिम्‍मा ही जनता ने आदित्‍यनाथ को सौंपा है।'

आनंद सिंह अपनी पत्‍नी सावित्री के साथ पौड़ी जिले के पांचूर गांव में रहते हैं। उन्‍होंने कहा, 'पहले दिन मुख्‍यमंत्री ने अपने स्‍टाफ से कहा कि वे ऐसी भाषा का इस्‍तेमाल ना करें, जिससे किसी को दुख पहुंचे। यह अच्‍छा कदम है, जिसका प्रभाव देखने को भी मिल रहा है। अब उन्‍हें खुद को हिंदुत्‍व प्रचारक की छवि से भी खुद को निकालना चाहिए।'

बता दें कि योगी आदित्‍यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्‍ट है और उनका जन्‍म 5 जून 1972 में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा पौड़ी में ही हुई। बीएससी उन्‍होंने कोटद्वार कॉलेज से की। आनंद बिष्‍ट ने बताया कि जब 1993 में आदित्‍यनाथ एमएससी कर रहे थे, तभी वह घर छोड़कर गोरखपुर चले गए थे। हमें यह समझने में एक साल लगा कि हमारे बेटे ने संन्‍यास लेने का फैसला कर लिया है।


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