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शरद की सदस्यता बचाने की जंग में मोर्चा संभालेंगे दिग्गज कांग्रेसी वकील

Publish Date:Tue, 29 Aug 2017 09:42 AM (IST) | Updated Date:Tue, 29 Aug 2017 09:42 AM (IST)
शरद की सदस्यता बचाने की जंग में मोर्चा संभालेंगे दिग्गज कांग्रेसी वकीलशरद की सदस्यता बचाने की जंग में मोर्चा संभालेंगे दिग्गज कांग्रेसी वकील
विपक्षी खेमे के सूत्रों ने बताया कि जदयू का नीतीश खेमा अपने संविधान के जिस 10वीं अनुच्छेद का हवाला देकर शरद की सदस्यता रद कराने की बात कह रहा है।

नई दिल्ली, संजय मिश्र। जनता दल यूनाइटेड के नीतीश विरोधी खेमे के नेता शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता बचाने के कानूनी दांव-पेंच में कांग्रेस के दिग्गज वकील नेता उनकी मदद करेंगे। सदस्यता खत्म कराने के नीतीश खेमे के एलान के बाद कांग्रेस के रणनीतिकारों ने इस लड़ाई में शरद को साथ देने का भरोसा दिया है।

सूत्रों के अनुसार, नीतीश खेमे के सदस्यता रद कराने के दांव को नाकाम करने के लिए शरद के कानूनी सलाहकार जनता दल यूनाइटेड के पार्टी संविधान के प्रावधानों का सहारा लेंगे। इससे साफ है कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू के पास शरद की सदस्यता रद कराने की याचिका पहुंचने से पहले ही विपक्षी खेमे में इसका मुकाबला करने की कसरत शुरू हो गई है।

सूत्रों के अनुसार इस क्रम में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी और पी चिदंबरम जैसे कानूनी दिग्गज शरद की मदद के लिए तैयार हैं। हालांकि विपक्षी खेमा नीतीश के साथ शरद की सीधी जंग में उनकी कानूनी मदद के लिए खुलकर तभी आएगा जब सदस्यता रद करने की याचिका दाखिल की जाएगी। शरद यादव के साथ पूरी मुस्तैदी से खड़ा होना कांग्रेस की भी सियासी जरूरत है, क्योंकि विपक्षी दलों को एकजुट करने की मुहिम में अब वे मुखर भूमिका निभा रहे हैं।

विपक्षी खेमे के सूत्रों ने बताया कि जदयू का नीतीश खेमा अपने संविधान के जिस 10वीं अनुच्छेद का हवाला देकर शरद की सदस्यता रद कराने की बात कह रहा है, शरद खेमा भी उसी अनुच्छेद को अपने बचाव का आधार बना रहा है। शरद खेमा पार्टी संविधान और कानून के हिसाब से नीतीश के अचानक भाजपा से हाथ मिलाने को जदयू में विभाजन के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा। समझा जाता है कि अपने इस कानूनी पक्ष को मजबूत करने के लिए ही शरद यादव ने अपने खेमे को असली जदयू बताते हुए चुनाव आयोग से पार्टी का चुनाव चिन्ह देने का अनुरोध किया है। आयोग में शरद खेमे ने यह भी दावा कर रखा है कि जदयू की अधिकांश राज्य इकाइयां उनके साथ है। सभापति के समक्ष भी शरद खेमा अपनी इन दलीलों को मजबूती से पेश करेगा।

इस लिहाज से शरद खेमा जदयू की अप्रैल में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पारित प्रस्ताव का अपने हक में मान रहा है। पार्टी ने इस प्रस्ताव में संघ और भाजपा मुक्त भारत के लिए उचित माहौल बनाने का प्रयास करने के लिए नीतीश को अधिकृत किया था। शरद खेमे के जदयू नेता जावेद रजा ने इस प्रस्ताव का हवाला देते हुए उलटे नीतीश पर पार्टी संविधान के उल्लंघन का आरोप पहले ही ठोक दिया है।

शरद समर्थकों के अनुसार राजद की रैली में शामिल होना जदयू के अप्रैल में पारित प्रस्ताव के अनुरूप है। उनका दावा है कि चूंकि पार्टी ने इस प्रस्ताव को वापस नहीं लिया है, ऐसे में दल बदल कानून शरद पर प्रभावी नहीं होता है। साथ ही इस बात के कानूनी पहलूओं की अनदेखी नहीं की जा सकती कि राजद की रैली में शरद अकेले नहीं तमाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मौजूद थे। इस लिहाज से यह मसला केवल एक पार्टी के नेता का दूसरी पार्टी के मंच पर जाना भर नहीं है। हालांकि शरद खेमे के बचाव के तर्कों के बावजूद यह हकीकत भी है कि इसी तरह के मामले में बिहार से ही राज्यसभा सांसद रहे कैप्टन जयनारायण प्रसाद निषाद की सदस्यता दल बदल कानून के तहत रद कर दी गई थी।

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Web Title:Congress Party Solidly behind Sharad Yadav(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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