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सिटीजन चार्टर बिल मंजूर, देरी पर दंडित होंगे सरकारी बाबू

Publish Date:Thu, 07 Mar 2013 12:28 PM (IST) | Updated Date:Thu, 07 Mar 2013 09:23 PM (IST)
सिटीजन चार्टर बिल मंजूर, देरी पर दंडित होंगे सरकारी बाबू
नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। बिना किसी वजह के काम में देरी करने वाले सरकारी बाबुओं की अब शामत आने वाली है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को काम लटकाने वाले सरकारी कर्मचारियों पर जुर्

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। बिना किसी वजह के काम में देरी करने वाले सरकारी बाबुओं की अब शामत आने वाली है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को काम लटकाने वाले सरकारी कर्मचारियों पर जुर्माना लगाने से लेकर कड़ी कार्रवाई किए जाने वाले बहुप्रतीक्षित विधेयक को मंजूरी दे दी है। उम्मीद है कि विधेयक को अगले हफ्ते संसद में पेश कर दिया जाएगा।

इस विधेयक के दायरे में सरकार से सहायता प्राप्त गैरसरकारी संगठन भी होंगे। सूचना अधिकार कानून [आरटीआइ] की तर्ज पर विधेयक पूरे देश में लागू होगा। इसके तहत आने वाली सेवाओं को राज्यों को अपने सिटिजन चार्टर में शामिल करना पड़ेगा। मंत्रिमंडल से मंजूर विधेयक में आयकर रिटर्न, पेंशन, जाति प्रमाणपत्र, जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र, पासपोर्ट जैसी कई महत्वपूर्ण सेवाओं में देरी होने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत तय समयसीमा के भीतर काम न होने पर संबंधित कर्मचारी पर प्रतिदिन 250 रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि दिल्ली, बिहार और मध्य प्रदेश सहित देश के 10 राज्यों में ये कानून पहले से ही लागू है। इसीलिए कुछ विपक्षी दलों ने राज्य और केंद्र के कानूनों में दोहराव व भ्रम को लेकर सवाल भी उठाए हैं। राज्यों के सिटिजन चार्टर में कुछ सेवाओं के लिए समयसीमा भी तय की गई है। लेकिन ये सिटिजन चार्टर 2011 में लोकपाल के मुद्दे पर चले अन्ना आंदोलन के बाद केंद्र सरकार की रूपरेखा के मुताबिक नहीं बने हैं। इसके अलावा कई सेवाएं राज्यों के सिटिजन चार्टर के दायरे से बाहर रखी गई हैं।

इन सबके मद्देनजर केंद्र सरकार ने सिटिजन चार्टर विधेयक को ज्यादा व्यापक किया है। इसके तहत देश के हर व्यक्ति का यह अधिकार होगा कि उसे कोई भी सेवा एक उचित और तय समय सीमा में मिले। इसके अलावा यदि उसे संबंधित सेवा से कोई शिकायत है तो उसका निपटारा भी एक समय सीमा में हो जाए। विधेयक के तहत सरकार ने केंद्रीय सार्वजनिक शिकायत निपटारा आयोग बनाने का प्रावधान रखा है। साथ ही केंद्रीय सार्वजनिक शिकायत निपटारा आयोग में शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष अधिकारी नियुक्त होंगे। उक्त अधिकारी शिकायत दर्ज करने में जनता की मदद करेंगे। इसके अंतर्गत की गई कार्रवाई को भारतीय दंड संहिता के तहत न्यायिक कार्रवाई माना जाएगा।

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Web Title:Citizen charter bill : Bill passed by Union Cabinet(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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आपकी प्रतिक्रिया
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    vinod kumar Mishra

    जिला-न्यायालय भोपाल में कार्यरत कर्मचारी (श्री मिथिलेश मिश्र) को जाने-अनजाने किसी रिवेन्यु-मामलात में प्रस्तुत-अपील पर अंतरिम-आदेश उच्च-न्यायालय द्वारा यह कहते हुए कि- "पैंतालिस सप्ताह के अन्दर कर्मचारी के जबाबदारी निर्बहन संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत किया जाय" पारित किया गया था (.) जिसके साल-दो-साल से ऊपर समय व्यतीत हो चुका लेकिन आज-तक जबाबदार-अधिकारी द्वारा कथित न्यायालयीन-आदेश का परि-पालन नहीं किया जा सका (.) ऐसे मामलात में क्या - सम्बंधित अधिकारी को सजा मिलनी चाहिए या कि- नहीं

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    sachin mishra

    तो क्या वाकई में सुधर जाएंगे सरकारी बाबू

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    sudhir

    काम लटकाने वाले बाबुओं की खैर नहीं, यह हेडिंग पढ़कर कोई खुशी नहीं हुई। इस कानून से भी कोई खास फायदा होने वाला नहीं है। हमारे देश में कानून बनता है पर इनपर अमल कितना होता है यह सब जानते हैं

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    rahu

    इसका फायदा तभी होगा जब हम आम नागरिक अपना अधिकार जानेगे और उसको इस्तेमाल कारेन्गे

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    HOSHIYAR

    मे राजेश से सहमत हु और एक बात और कहना चाहुगा कि सरकार ने जो केंद्रीय सार्वजनिक शिकायत निपटारा आयोग बनाया है उसमे शिकायत करने वाले को शिकायत कि एक पर्ति यानि एक कापि या फोटो कापि मिलनि चाहिये और उस दोनो पर्तियो पर शिकायत करने वाले के हस्ताक्षर भी होने चाहिये जिससे ब्यान बदले ना जा सके !!जय भारत

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    Ashish Kumar Dubey

    It must be welcome, it is really appreciable..............

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    RAJESH

    केंद्र सरकार का यह फैसला काबिले तारीफ है, लेकिन इसका फायदा तभी होगा, जब इसका सख्ती से पालन होगा।

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