यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 26, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
म्यूचुअल फंड के लिए स्वनियमन चाहता है सेबी
बाजार नियामक सेबी 100 खरब रुपये के म्यूचुअल फंड (एमएफ) उद्योग में स्वनियमन के पक्ष में है। वह जल्द ही ...और पढ़ें

मुंबई। बाजार नियामक सेबी 100 खरब रुपये के म्यूचुअल फंड (एमएफ) उद्योग में स्वनियमन के पक्ष में है। वह जल्द ही वितरकों और एजेंटों के लिए नए नियम जारी करेगा।
यहां आयोजित म्यूचुअल फंड समिट के इतर पत्रकारों से बातचीत करते हुए सेबी के चेयरमैन यूके सिन्हा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'क्षेत्र में स्व नियामकीय संगठनों (एसआरओ) की मांग है। हम इसके लिए बहुत इच्छुक हैं। उम्मीद है कि इस पर शीघ्र कार्यान्वयन होगा।' सिन्हा ने यह भी बताया कि नियामक वितरकों व निवेशक परामर्शकों के लिए नियमों को अंतिम रूप दे रहा है। इन्हें शीघ्र जारी किया जाएगा। सेबी प्रमुख के मुताबिक, यद्यपि एसआरओ के विचार को कोर्ट में चुनौती दी गई है, लेकिन उन्हें इसके कार्यान्वयन की पूरी उम्मीद है। जस्टिस बीएन श्रीकृष्णा के नेतृत्व वाले फाइनेंशियल प्लानिंग सुपरवाइजरी फाउंडेशन (एफपीएसएफ) ने एसआरओ मामले में सेबी को अदालत में घसीट लिया है। एफपीएसएफ की दलील है कि यदि म्यूचुअल फंड के हितों की सुरक्षा करने वाला उद्योग समूह अपने वितरकों और एजेंटों को नियंत्रित करने के लिए कंपनी के तौर पर एसआरओ को नियुक्त करता है तो हितों में टकराव की संभावना है। सिन्हा ने यह भी कहा कि पेंशन कोषों को म्यूचुअल फंड क्षेत्र में आना चाहिए और रीयल इस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्टों व इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेशकों के लिए भी कर लाभ की पेशकश की जानी चाहिए।
