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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

फिर से खुलेंगे निजी पेट्रोल पंप

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Published: Wed, 10 Sep 2014 07:32 PM (IST)

डीजल मूल्य के नियंत्रणमुक्त होने की संभावना बलवती होने के साथ ही पेट्रोलियम बाजार में भी चहल-पहल शुरू हो गई ...और पढ़ें

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नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। डीजल मूल्य के नियंत्रणमुक्त होने की संभावना बलवती होने के साथ ही पेट्रोलियम बाजार में भी चहल-पहल शुरू हो गई है। सरकार से पेट्रोल पंप खोलने का लाइसेंस ले चुकीं निजी क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने नए सिरे से रणनीति बनानी आरंभ कर दी है। सब कुछ ठीक रहा तो रिलायंस इंडस्ट्रीज, एस्सार ऑयल और शेल जैसी पेट्रोलियम कंपनियां इस वित्त वर्ष के अंत या अगले वित्त वर्ष की शुरुआत से अपने पेट्रोल पंप नेटवर्क स्थापित करना चालू कर देंगी।

बारह साल पहले इन कंपनियों को पिछली राजग सरकार ने ही पेट्रोल पंप खोलने की अनुमति दी थी। काफी पेट्रोल पंप खुले भी थे। आज नई राजग सरकार के कार्यकाल में फिर से उसी अनुमति के आधार पर पेट्रोल पंप खुलने जा रहे हैं। रिलायंस, पेट्रोलियम व शेल और सरकारी क्षेत्र की नुमालीगढ़ रिफाइनरी (एनएमएल) व ओएनजीसी को कुल मिलाकर 10,000 पेट्रोल पंप खोलने की इजाजत दी गई थी। तब सरकार ने पेट्रोल व डीजल की कीमत को पूरी तरह से बाजार आधारित कर दिया था। लेकिन बाद में इस फैसले को लागू नहीं किया गया। लिहाजा सरकारी कंपनियों के मुकाबले निजी तेल कंपनियों के पेट्रोलियम उत्पाद काफी महंगे होते थे। निजी तेल कंपनियां ज्यादा दिनों तक घाटा वहन नहीं कर सकीं। वर्ष 2007 के बाद इन्होंने अपने पेट्रोल पंप बंद करने शुरू कर दिए। एस्सार को छोड़कर बाकी कंपनियों ने अपने पंप लगभग बंद ही कर दिए थे। इधर एक-दो साल में रिलायंस ने फिर से अपने चुनिंदा पेट्रोल पंप खोल दिए थे। सरकारी कंपनी ओएनजीसी को भी 500 पेट्रोल पंप खोलने की इजाजत मिली थी।

अब पेट्रोल के बाद डीजल कीमत को भी सरकारी नियंत्रण से बाहर करने की तैयारी है। ऐसे में निजी तेल कंपनियां दोबारा बाजार में उतरने को तैयार हैं। एस्सार के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी एक से डेढ़ वर्ष के भीतर एक हजार नए पेट्रोल पंप खोलने की मंशा रखती है। वर्ष 2010-11 में भी कंपनी ने ऐसी ही तैयारी की थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमत के अचानक बढ़ने और पेट्रोलियम सब्सिडी में भी बढ़ोतरी के बाद इस योजना को लागू नहीं किया गया। एस्सार को 2,500 पेट्रोल पंप खोलने की इजाजत मिली हुई है। कंपनी ने कई शहरों में जगह भी लीज पर ले रखी है।

इंडियन ऑयल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सरकारी तेल कंपनियों ने भी निजी क्षेत्र से संभावित प्रतिस्पद्र्धा को देखते हुए अपने स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। सभी तेल कंपनियां अगले दो वर्षो तक न सिर्फ तेजी से विस्तार करेंगी, बल्कि आधुनिक तकनीकी के इस्तेमाल पर भी ज्यादा ध्यान देंगी। इन कंपनियों को अब गुणवत्ता, मिलावट व ग्राहक सेवा पर काम करना होगा। कच्चे तेल (क्रूड) की कीमत काफी कम होने से डीजल पर सरकारी तेल कंपनियों का घाटा दस पैसे प्रति लीटर से भी कम रह गया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने संकेत दिए हैं कि सरकार डीजल कीमत को बाजार के हवाले कर सकती है।

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