यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 08, 2015 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
चीन से आयात हो रहा प्लास्टिक युक्त चावल
राजधानी में फल-सब्जियों को पकाने व ताजा रखने के लिए रसायन का प्रयोग होने की बात कई बार हाई कोर्ट ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में फल-सब्जियों को पकाने व ताजा रखने के लिए रसायन का प्रयोग होने की बात कई बार हाई कोर्ट में उठ चुकी है। लेकिन बुधवार को चीन से प्लास्टिक युक्त चावल आयात होने का मामला सामने आया है। हाई कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि चीन से प्लास्टिक युक्त चावल आयात कर व्यापारी फायदे के लिए उसे असली चावल में मिलाकर बेच रहे हैं। यह चावल लोगों के स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी व जस्टिस जयंत नाथ की पीठ ने मामले को गंभीरता से लिया है और याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी। बता दें कि बुधवार को याचिकाकर्ता अधिवक्ता सुग्रीव दुबे की फल-सब्जियों में रसायन का प्रयोग होने संबंधी याचिका पर सुनवाई तय थी।
इस दौरान याचिकाकर्ता ने नया आवेदन दायर कर पीठ के समक्ष चीन से आयात हुए प्लास्टिक युक्त चावलों की जानकारी दी। याचिकाकर्ता के अनुसार पिछले कई वर्षो से देश में चीन से प्लास्टिक युक्त चावल का आयात हो रहा है। लोग प्लास्टिक युक्त चावल व असली चावल के अंतर को नहीं पहचान सकते हैं। इस चावल को उबालने के बाद खाने पर यह असली चावल के समान पचता नहीं है और इससे पेट संबंधी गंभीर बीमारियां होती हैं।
याचिका में बताया गया है कि बड़ी तादाद में चावल का आयात हो रहा है, लेकिन उनकी गुणवत्ता की जांच के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। इनके सैंपल भी नहीं लिए जा रहे हैं। चावल के अलावा बाजार में हिंग, दाल और आम में रसायन का प्रयोग किया जा रहा है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि सरकार को थोक दुकानदारों के यहां छापा मारने एवं वहां से सैंपल लेने का निर्देश दिया जाए।
