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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 06, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

गुजर गया अर्थव्यवस्था का खराब दौर

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Published: Wed, 06 Aug 2014 01:58 AM (IST)Updated: Wed, 06 Aug 2014 01:59 AM (IST)

अर्थव्यवस्था का बुरा दौर अब बीत चुका है। इसके बावजूद संप्रग के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की जो दुर्गति हुई है, ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जाब्यू]। अर्थव्यवस्था का बुरा दौर अब बीत चुका है। इसके बावजूद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था की जो दुर्गति हुई है, उसे पटरी पर लाने में कम से कम दो साल लगेंगे। अगले दो वर्ष तक आर्थिक विकास की दर सुस्त ही बनी रहेगी। महंगाई की समस्या भी कमोबेश बरकरार रहेगी। आरबीआइ के गवर्नर रघुराम राजन ने मौद्रिक नीति की द्विमासिक समीक्षा करते हुए अर्थव्यवस्था की जो दशा व दिशा पेश की है, उसका लब्बोलुआब यही है।

राजन ने चालू वित्त वर्ष 2014-15 के लिए खुदरा मूल्य आधारित महंगाई की दर के आठ फीसद रहने का लक्ष्य रखा है। जून, 2014 में यह दर 7.31 फीसद थी। इसके साथ ही आरबीआइ गवर्नर ने यह भी कहा है कि जनवरी, 2016 तक खुदरा महंगाई की दर को छह फीसद पर लाने के लिए हरसंभव कोशिश की जाएगी। महंगाई के खिलाफ जंग जीतना ही होगा, क्योंकि उसके बगैर विकास के फायदे को अधिकांश आबादी तक नहीं पहुंचाया जा सकता।

इसके साथ ही मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर के बारे में आरबीआइ का मानना है कि यह 5.5 फीसद रहेगी। अगले वित्त वर्ष में जब महंगाई दर छह फीसद पर आ जाएगी, तब विकास दर भी इसी आंकड़े के करीब रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक की ओर से पेशेवरों के बीच कराए गए सर्वे में विकास दर के 5.3 फीसद रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि राजन मानते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे खराब दौर गुजर चुका है। निवेशकों के लिए अब यहां निवेश के बेहतरीन मौके उपलब्ध हैं। खास तौर पर जिस तरह से केंद्र में एक स्थिर सरकार बनी है, उससे नीतियों को लेकर कोई असमंजस नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह स्वीकार किया जा रहा है कि भारत कोई जोखिम भरा बाजार नहीं है।

आरबीआइ से पहले विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष समेत निजी क्षेत्र की कुछ एजेंसियों मसलन डीबीएस, नोमुरा वगैरह ने भी अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है कि भारत को 8-9 फीसद की तेज रफ्तार पकड़ने में तीन से चार वर्ष लग सकते हैं। लेकिन इसके लिए मोदी सरकार को कई कड़वे फैसले करने होंगे। उसे आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना होगा।

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