यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
देश में तेजी से पैर फैला सकेंगे विदेशी बैंक
आने वाले दिनों में देश में विदेशी बैंकों का तेजी से प्रसार हो सकता है। दरअसल, आरबीआइ ने भारत में ...और पढ़ें

नई दिल्ली [जागरण ब्यूरो]। आने वाले दिनों में देश में विदेशी बैंकों का तेजी से प्रसार हो सकता है। दरअसल, आरबीआइ ने भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी खोलने वाले विदेशी बैंकों को एक भारतीय बैंक की तरह रियायतें देने की घोषणा की है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने यह स्पष्ट किया है कि विदेशी बैंकों को आवश्यक तौर पर पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी नहीं खोलनी पड़ेगी। उन्हें स्वैच्छिक तौर पर सब्सिडियरी खोलने के लिए कहा गया है।
वार्षिक मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि अगस्त, 2010 से पहले से भारत में स्थापित विदेशी बैंकों को उक्त सब्सिडियरी खोलने पर राष्ट्रीयकृत बैंकों के समान सुविधाएं मिलेंगी। यानी नई शाखा खोलने को लेकर तमाम तरह की मंजूरियां लेने की जरूरत नहीं होगी। विदेशी बैंक उक्त सब्सिडियरी को 500 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी के साथ खोल सकते हैं। इस बारे में विस्तृत नीति की घोषणा अगले 15 दिनों के भीतर होगी।
पिछले महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष की वाशिंगटन में हुई बैठक में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विदेशी बैंकों को भारत में ज्यादा सहूलियत देने का एलान कर दिया था। इसका प्रमुख विपक्षी दर भाजपा ने काफी विरोध किया था। लेकिन आज केंद्रीय बैंक ने सरकार के एलान को एक तरह से अमल में ला दिया।
देश में नए बैंकिंग लाइसेंस देने के मुद्दे पर राजन ने कहा है कि इस पर गठित समिति की पहली बैठक दो दिन बाद यानी एक नवंबर को होगी। पूर्व आरबीआइ गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में गठित यह समिति निजी क्षेत्र की तरफ से आए आवेदनों की जांच पड़ताल करेगी। केंद्र सरकार जल्द से जल्द इस बारे में फैसला करने का दबाव रिजर्व बैंक पर बनाये हुए है। आरबीआइ गवर्नर पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि मार्च, 2014 से पहले नए बैंकिंग लाइसेंस दिए जाएंगे।
