यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 18, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सूदखोरी से बचें बैंक : आरबीआई
आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे ग्राहकों पर अत्यधिक दर पर ब्याज का बोझ न लादें। लोन पर ...और पढ़ें

नई दिल्ली। आरबीआई ने बैंकों से कहा है कि वे ग्राहकों पर अत्यधिक दर पर ब्याज का बोझ न लादें। लोन पर प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क भी इसमें शामिल है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, 'बैंकों को ऐसे दिशानिर्देश देने का कोई प्रस्ताव नहीं है कि वे ग्राहकों को एक-समान ब्याज दर पर लोन दें। ऐसा इसलिए, क्योंकि उनकी लागत, बिजनेस मॉडल और मार्जिन अलग-अलग होते हैं।'
जेटली ने कहा, 'रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों के निदेशक मंडल को सलाह दी है कि वे लोन और दूसरे तरह के कर्जो पर ग्राहकों से अत्यधिक दरों पर ब्याज [जिसमें प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्जेज शामिल हैं] न वसूलने के लिए आंतरिक सिद्घांत और प्रक्रिया अपनाएं।'
ब्याज दरें नियंत्रण मुक्तजेटली ने कहा कि बैंकों की तरफ से दिए जाने वाले कर्ज की ब्याज दरों पर सरकार या रिजर्व बैंक का कोई नियंत्रण नहीं है। इसका फैसला संबंधित बैंकों के निदेशक मंडल करते हैं। वित्त मंत्री ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा, 'कर्जदारों से वसूले जाने वाले ब्याज की दर बैंकों की आधार दर [बेस रेट] पर आधारित होती है। इस मामले में ग्राहकों की स्थिति पर भी गौर किया जाता है। इसके अलावा ब्याज की दर पर जोखिम और कर्ज की अवधि जैसी चीजों का असर पड़ता है।'
अक्सर बैंक पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड पर दिए जाने वाले कर्ज पर ज्यादा ब्याज वसूलते हैं। रकम जारी करने से पहल प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क भी वसूलते हैं। आरबीआई के कदम से इनपर लगाम लग सकता है।
