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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 16, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

डगमगा तो नहीं रही बैंकों की साख

By Manoj YadavEdited By:
Published: Tue, 16 Dec 2014 07:11 PM (IST)Updated: Wed, 17 Dec 2014 12:14 AM (IST)

जमा दरों में कटौती के नए सिलसिले से आम ग्राहकों में बैंकों को लेकर बेरुखी पैदा हो सकती है। बैंकों ...और पढ़ें

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नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन]। जमा दरों में कटौती के नए सिलसिले से आम ग्राहकों में बैंकों को लेकर बेरुखी पैदा हो सकती है। बैंकों में जमाराशि को उनकी साख का आधार माना जाए तो यकीनन देश के बैंकों के सामने साख का संकट पैदा हो गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान देश के बैंकों की जमाराशि में महज 3.63 फीसद की बढ़ोतरी हुई है जो पिछले एक दशक की सबसे कम वृद्धि है। ब्याज दरों में वृद्धि के मद्देनजर हाल के दिनों में बैंकों ने नए सिरे से जमा दरों में कटौती शुरू कर दी है। इससे जमाराशि में और कमी हो सकती है।

जमा दरों के रसातल में जाने की संभावना से वित्त मंत्रालय भी बौखलाया हुआ है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले दिनों सरकारी बैंक प्रमुखों के साथ बैठक में इस मुद्दे को उठाया था। बैंकों को कहा गया है कि जमाराशि की वृद्धि दर में थोड़ी बहुत कमी तो समझी जा सकती है, लेकिन छह महीने में इसके 14 फीसद से घटकर चार फीसद पर आ जाने को स्वीकार नहीं किया जा सकता। बैंकों को जमाराशि में वृद्धि की रफ्तार तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा गया है। दरअसल, घरेलू बचत दर के पहले से ही काफी नीचे चले जाने से सरकार चिंतित है। ऊपर से अब बैंकों की जमा स्कीमों में पैसा रखने वालों की तादाद घटने का और नकारात्मक असर होगा। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इसके दोहरे दुष्परिणाम हो सकते हैं। बैंकों की जमा स्कीमों में पैसा नहीं लगाने वाला वर्ग आम तौर पर सोने में निवेश करता है। अब हालात ऐसे बन सकते हैं कि बड़ी संख्या में लोग फिर से सोना खरीदने लगें। इससे सोना तस्करी और बढ़ सकती है, जो पहले ही सरदर्द बनी हुई है।

आंकड़े बताते हैं कि सभी तरह के बैंकों में पैसा रखने वालों की तादाद तेजी से घटी है। मार्च, 2014 में निजी बैंकों की जमाराशि में वृद्धि की रफ्तार 14.18 फीसद थी। यह सितंबर, 2014 को समाप्त छमाही में घटकर 5.64 फीसद हो गई है। सरकारी बैंकों में जमा वृद्धि की यह रफ्तार 13.13 से घटकर महज 3.09 फीसद रह गई है। मार्च, 13 को समाप्त वर्ष में यह रफ्तार 14.04 फीसद और इसके पिछले वर्ष 13.06 फीसद थी।

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