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अब टीवी की टेंशन नहीं

Publish Date:Mon, 20 Mar 2017 11:26 AM (IST) | Updated Date:Mon, 20 Mar 2017 02:33 PM (IST)
अब टीवी की टेंशन नहींअब टीवी की टेंशन नहीं
मनोरंजन के साधनों को लेकर पसंद बदल रही है महिलाओं की। अब टीवी देखने के मुकाबले वे स्मार्टफोन पर ज्यादा समय बिता रहीं हैं।

यूट्यूब पर सहजता से उपलब्ध वीडियो कंटेंट, फेसबुक पर शेयरिंग, फुर्सत में गेम खेलने और मोबाइल में ही टीवी देखने वाली महिलाओं की संख्या में लगातार हो रहा है इजाफा...

‘साक्षी, आजकल शाम के समय तुम्हारा टीवी बंद रहता है! क्या टीवी सीरियल्स रास नहीं आ रहे हैं? पहले तो मेरे फ्लैट तक टीवी की आवाज आती थी, अब क्या हो गया?’ ‘ऐसी कोई बात नहीं है शिल्पा, अब कौन इंतजार करे टीवी पर सीरियल देखने का?’ ‘तो क्या देखना ही छोड़ दिया है!’ ‘नहीं, ऐसा भी नहीं है। हां, टीवी पर सीरियल देखना थोड़ा कम जरूर हुआ है। सीरियल का नया एपिसोड तो रात में आता है और उसी समय घर के काम भी निपटाने होते हैं। ऐसे में जब भी फुर्सत मिलती है, मनचाहा एपिसोड मोबाइल पर ही देख लेती हूं और समय रहा तो टीवी तो है ही!

अब कोई फिक्र नहीं
जी हां, वक्त के साथ महिलाओं के रूटीन में भी चेंज आ गया है। कभी टीवी से चिपकी रहने वाली महिलाओं से उनके फेवरेट शो के समय बात करना भी मुश्किल होता था। कोई टोक दे तो समझो शामत है। उन्हें बस यही चिंता रहती थी कि आगे क्या होने वाला है। बहू के साथ सास क्या करने वाली है और बहू किस तरह से सास को मात देने वाली है। रोबोट बनी युवती की कॉमेडी; तंत्र-मंत्र और नागिन के रोचक किस्सों का क्या होगा। पर समय ने करवट ली, तो 4जी स्पीड के साथ स्मार्टफोन अफोर्डेबल हो गया। पता चला कि यूट्यूब पर छूटे हुए एपिसोड देखे जा सकते हैं। अब कोई फिक्र नहीं है। टीवी पर एपिसोड मिस भी हो जाए, तो स्मार्टफोन पर आसानी से मिल जाता है।

बहुत कुछ नया है
नया जमाना है। 4 जी कनेक्टिविटी से लैस स्मार्टफोन है। बेपनाह ब्राउजिंग की सुविधा है। इसका चस्का लग गया, तो टीवी ओल्ड वर्जन लगने लगा। न बीच-बीच में आने वाले विज्ञापनों का झंझट और न ही टाइम बाउंडेशन। साक्षी जैसी महिलाएं जो टीवी पर पसंदीदा शो आने के समय चिपकी रहती थीं, हाथ में मोबाइल आने से उनका रूटीन बदल गया। स्मार्टफोन ने उन्हें च्वाइस दे दी है। कॉल करने की सुविधा, व्हाट्सएप्प, फेसबुक, गेम खेलना, वीडियो चैट और ब्राउजिंग, जब जो चाहो सर्च करो और देखो। फिर चाहे कोई टीवी चैनल ही क्यों न हो। टीवी पर जो दिखाया जाना है उसे ही देखना है, वो भी तय समय पर। मोबाइल पर समय की कोई पाबंदी नहीं है। यही कारण है कि महिलाओं का अधिक समय मोबाइल पर बीत रहा है।

जो चाहो मिलता है
वर्किंग लेडी के लिए टीवी पर समय बिताना आसान नहीं होता। जॉब और घर की जिम्मेदारी के बीच इतना समय नहीं मिल पाता कि टीवी से चिपके रहा जा सके। छुट्टियां हों तो बात अलग है। तब फैमिली के साथ टीवी पर फिल्म या किसी शो को एंजॉय करना बनता है। अब स्मार्टफोन में 4जी इंटरनेट है, एप्स हैं, किसी से भी कनेक्ट होने की आजादी है। फैशन डिजाइनर ब्यूटी शुक्ला कहती हैं, ‘टीवी देखने का टाइम बहुत कम मिल पाता है और इनमें मेरा इंट्रेस्ट भी कम है। हां, जब किसी शो की बहुत चर्चा सुनती हूं तो उसे देखने का मन हो जाता है। हाथ में मोबाइल हो, तो जब चाहो जो चाहे देख सकते हैं। सो, जब भी फुर्सत मिलती है मोबाइल को ही टीवी बना लेती हूं। मोबाइल आज हर वर्किंग लेडी को वर्चुअल वल्र्ड से कनेक्ट किए हुए है और अपडेट भी रखता है।’

कम न समझो टीवी से
टेक्नोलॉजी ने स्मार्टफोन को पॉकेट टीवी बना दिया है और मोबाइल का उपयोग करने में पुरुषों से काफी आगे निकल रही हैं महिलाएं। शिक्षिका मुक्ता गंग कहती हैं, ‘टीवी पर प्रोग्राम कब से नहीं देखे हैं, याद नहीं। जब पढ़ती थी तब जरूर टीवी पर कंटीन्यू कुछ शो देखा करती थी, काफी समय बिताती थी। जब से जॉब में आई हूं, टीवी कभी-कभार ही देख पाती हूं। जो भी देखना होता है स्मार्टफोन की मदद लेती हूं। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चैटिंग हो या किसी चैनल के फेवरेट शो को देखना हो, सबकुछ हाथ में है। टीवी से कम नहीं है आज स्मार्टफोन। मैं क्या मेरी कलीग्स भी मोबाइल को टीवी के तौर पर यूज करती हैं।’

-दो गुना वक्त बिताती हैं महिलाएं पुरुषों की तुलना में स्मार्टफोन पर वीडियो देखने और गेम्स खेलने में। फेसबुक को पुरुषों की तुलना में 1.6 गुना ज्यादा वक्त देती हैं महिलाएं। -मोबाइल मार्केटिंग एसोसिएशन और आईएमआरबी की रिपोर्ट

-71 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स ऑनलाइन गेम्स के दीवाने होते हैं। इनमें भी महिलाओं का औसत 47 फीसदी है। -फेसबुक आईक्यू-टीएनएस सर्वे

प्रस्तुति-  मलय बाजपेयी

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Web Title:No tension of Television(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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