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गुजरात की 5 ऐतिहासिक जगहें, जो हर भारतीय को एक बार जरूर घूमनी चाहिए

Publish Date:Thu, 14 Sep 2017 06:09 PM (IST) | Updated Date:Thu, 14 Sep 2017 06:09 PM (IST)
गुजरात की 5 ऐतिहासिक जगहें, जो हर भारतीय को एक बार जरूर घूमनी चाहिएगुजरात की 5 ऐतिहासिक जगहें, जो हर भारतीय को एक बार जरूर घूमनी चाहिए
जापानी पीएम अपने गुजरात दौरे के दौरान कई ऐतिहासिक जगहों पर गए। सैय्यद मस्‍जिद के अलावा ये जगहें गुजरात को बनाती हैं खास..

1. सीदी सैय्यद मस्‍जिद :

अहमदाबाद के ठीक बीचोंबीच लाल दरवाजा के पास बनी ये मस्जिद भारतीय-अरबी नक्काशी का बेजोड़ नमूना है। इसकी दीवारों पर मार्बल लगाए गए हैं। मस्जिद की पश्चिमी ओर की खिड़कियों में जालियां बनी हुई हैं। कुल आठ जालियों के साथ इस मस्जिद को बनाया गया है। इन जालियों पर ही पत्‍थर से नक्‍काशी और खुदाई करके पेड़ बनाया गया है, जो बेहद खूबसूरत है और यही इसको अलग बनाता है।

2. लोथल :

लोथल प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के शहरों में से एक बहुत ही महत्वपूर्ण शहर है। लगभग 2400 ईसापूर्व पुराना यह शहर भारत के राज्य गुजरात के भाल क्षेत्र में स्थित है और इसकी खोज सन 1954 में हुई थी। यह  अहमदाबाद ज़िले में 'भोगावा नदी' के किनारे 'सरगवाला' नामक ग्राम के समीप स्थित है।

3. रानी की वाव :

रानी की वाव भारत के गुजरात राज्य के पाटण में स्थित प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआँ) है। 22 जून 2014 को इसे यूनेस्को के विश्व विरासत स्थल में सम्मिलित किया गया। वाव के खंभे सोलंकी वंश और उनके वास्तुकला के चमत्कार के समय में ले जाते हैं। वाव की दीवारों और स्तंभों पर अधिकांश नक्काशियां, राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि, आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

4. धोलावीरा :

गुजरात में कच्छ प्रदेश के उतरीय विभाग खडीर में धोलावीरा गांव के पास पांच हजार साल पहले विश्व का यह प्राचीन महानगर था। उस जमाने में लगभग 50,000 लोग यहाँ रहते थे। हड़प्पा संस्कृति के इस नगर की जानकारी 1960 में हुई और 1990 तक इसकी खुदाई चलती रही। हड़प्पा, मोहन जोदडो, गनेरीवाला, राखीगढ, धोलावीरा तथा लोथल ये छः पुराने महानगर पुरातन संस्कृति के नगर है। जिसमें धोलावीरा और लोथल भारत में स्थित है।

5. साबरमती आश्रम :

साबरमती आश्रम भारत के गुजरात राज्य अहमदाबाद जिले के प्रशासनिक केंद्र अहमदाबाद के समीप साबरमती नदी के किनारे स्थित है। सत्याग्रह आश्रम की स्थापना सन् 1917 में अहमदाबाद के कोचरब नामक स्थान में महात्मा गांधी द्वारा हुई थी। सन् 1917 में यह आश्रम साबरमती नदी के किनारे वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित हुआ और तब से साबरमती आश्रम कहलाने लगा। आश्रम के वर्तमान स्थान के संबंध में इतिहासकारों का मत है कि पौराणिक दधीचि ऋषि का आश्रम भी यही पर था।

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Web Title:5 Historical Monuments of National Importance in Gujarat(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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